विकास वर्मा हरियाणा ब्यूरो गुरुग्राम

राजस्व विभाग सहित कई विभागों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल चुके सेवानिवृत्त वरिष्ठ आइएएस अधिकारी डॉ. एनसी वधवा का मानना है कि बोगस सी-फार्म जारी करके प्रदेश के आबकारी एवं कराधान विभाग के आरोपित अधिकारियों ने देश के साथ धोखाधड़ी की है। सभी के खिलाफ धोखाधड़ी के साथ ही आपराधिक साजिश करने का मामला दर्ज होना चाहिए। आरोपित अधिकारी या विभाग के अन्य अधिकारी गलत तर्क दे रहे हैं कि बोगस सी-फार्म जारी करने से प्रदेश सरकार के राजस्व का नुकसान नहीं हुआ।

रविवार को दैनिक जागरण से बातचीत में डॉ. वधवा ने कहा कि बोगस सी-फार्म जारी करने से सबसे अधिक नुकसान दिल्ली सरकार को हुआ है क्योंकि हरियाणा के कारोबारी सबसे अधिक कारोबार दिल्ली से करते हैं। इसके बाद पंजाब का नंबर आता है। उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र एवं पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों से भी कारोबार किया जाता है। क्या दिल्ली, पंजाब, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र एवं पश्चिम बंगाल देश से बाहर हैं। क्या इन राज्यों के राजस्व का नुकसान देश का नुकसान नहीं है? क्या हरियाणा देश से बाहर है? गलत तर्क देने वाले अधिकारी यह स्वीकार कर रहे हैं उनके लिए देश का नुकसान मायने नहीं रखता। जो भी अधिकारी गलत तर्क दे रहे हैं उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

अन्य राज्य सरकार भी अपने अधिकारियों की कार्यशैली की जांच करे

दिल्ली सहित अन्य राज्य सरकारों को भी अपने अधिकारियों की कार्यशैली की जांच करनी चाहिए। बिना मिलीभगत के फर्जी कारोबार के नाम पर कारोबारियों ने रिफंड कैसे ले लिया। लापरवाही एक या दो बार गलत होने पर मानी जाती है न कि बार-बार गलत करने पर। बार-बार यदि गलत किया जाता है तो साफ है कि मामला मिलीभगत का है। साथ ही सभी सरकार अपने डीलरों के कारोबार की जांच कराए। जीएसटी लागू होने से पहले के कुछ महीने की ही जांच कराने पर पूरी सच्चाई सामने आ जाएगी। डीलरों यानी कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई से पूरा मामला सामने आ जाएगा। डीलर बता देंगे कि उनकी मिलीभगत किन-किन अधिकारियों या कर्मचारियों के साथ थी। यदि पूरी व्यवस्था बेहतर करनी है तो आरोपित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ ही लाभ उठाने वाले कारोबारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। बॉक्स :

क्या है सी-फार्म घोटाला

जीएसटी लागू होने से पहले अंतरराज्यीय कारोबार करने पर सी-फार्म का इस्तेमाल किया जाता था। इस सुविधा से एक राज्य का कारोबारी दूसरे राज्य से माल केवल दो प्रतिशत टैक्स देकर खरीदता था। इस विशेष सुविधा का दिल्ली सहित कई राज्यों के कारोबारियों ने जमकर गलत लाभ उठाया। कारोबारियों ने हरियाणा के किसी भी जिले में फर्जी कंपनी बनाकर पंजीकरण करा लिया। बाद में फर्जी कंपनी से कारोबार दिखाकर अपनी राज्य सरकार से रिफंड ले लिया। मामले में हरियाणा के 9 अधिकारी निलंबित हो चुके हैं। 15 से अधिक अधिकारियों के ऊपर कभी भी गाज गिर सकती है।