सुलतानपुर ब्यूरो भानू मिश्रा के साथ अमन बर्मा एवं कैंमरा मैन आर. के. की रिपोर्ट
जिले के परिषदीय स्कूलों को माडर्न कर इंग्लिश मीडियम बनाने की मंशा पर पानी फिर रहा है। शिक्षण सत्र शुरु होने के छ माह बाद भी स्कूलों में कॉपी-किताब तक नहीं पहुंची है। बच्चों के बैठने के लिए न तो सहीं इंतजाम है और न ही पढ़ाई की व्यवस्था।
जिले के परिषदीय स्कूलों को माडर्न कर इंग्लिश मीडियम बनाने की मुहिम फेल नजर आ रही है। मजबूरी में यहां दाखिला लेने वाले बच्चे हिंदी मीडियम की फटी-पुरानी किताबों से काम चला रहे हैं।निजी स्कूलों के बढ़ते प्रभाव और परिषदीय स्कूलों के प्रति लोगों के हो रहे मोहभंग को देखते हुए शासन ने परिषदीय स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम से विकसित करने का फैसला लिया था। इसके तहत जिले के चयनित विघालयों को शामिल किया गया। अफसरों ने स्कूलों को चिन्हित करके वहां पर अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाने वाले शिक्षकों की तैनाती भी कर दी। इसके बावजूद यह स्कूल बदहाली के शिकार हैं। एक अप्रैल से शैक्षिक सत्र शुरु हो गया है। स्कूलों में अभी अंग्रेजी माध्यम की किताबें तक नहीं पहुंचाई जा सकीं।
टीम के द्वारा जब सुल्तानपुर सीमावर्ती क्षेत्र पर चयनित इंग्लिश मीडियम विघालय भरसारे की जमीनी हकीकत जानी गई तो सारा मामला उजागर हो गया। बच्चों और अध्यापकों से बातें करने पर पता चला कि अभी तक मात्र कक्षा 1, कक्षा 2 एवं कक्षा 3 की मात्र दो – दो किताबें उप्लब्ध हो पाई हैं। बच्चे हिन्दी मीडियम की पुरानी किताबों से पढाई कर रहे हैं।
चुनाव प्रचार में सभी पार्टियां बड़े बड़े वादे करते हैं परन्तु वो वो जमीनी हकीकत पर शून्य नजर आते हैं। मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ ने ये निर्णय लिया था कि परिषदीय को चयनित करके इंग्लिश मीडियम बनाकर उच्च शिक्षा प्रदान की जारेगी। विघलय चयनित भी हुये परन्तु विघालय चयनित होने से शिक्षा का स्तर नहीं बढता इसके लिये किताबों की आवश्यक्ता होती जिसकी व्यावस्था अभी तक सरकार या शिक्षा विभाग नहीं कर पाया है। ऐसे में शिक्षा विभाग पर सवाल बनता है कि जब कॉपी न किताब, बच्चे होंगे कैसे कामयाब?

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