Image result for pic of  IASमहाराष्ट्र न्यूज: IAS बनने में सबसे मददगार रही पिता जी द्वारा सिखाई एक आदत
Ntv time deepak tiwari 
  IAS Shiv Prasad Nakate success Story on National Youth Day
सोलापुर (महाराष्ट्र). युवा दिवस (National Youth Day) पर पढ़िए 25 की उम्र में कलेक्टर बने शिवप्रसाद मदन नकाते की कहानी। इन्होंने खुद युवाओं के लिए लिखी। महाराष्ट्र में सोलापुर जिला मुख्यालय से 70 किलोमीटर गांव माडा के साधारण किसान परिवार में मेरा बचपन गुजरा। पिता मदन नकाते एक सामान्य किसान और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। बचपन में पिताजी को लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी कार्यालयों में जाते देखा। कई बार उनके साथ जाने का मौका मिला तो अफसर बनकर लोगों के लिए कुछ राहत का काम करने का मन बनाया। ठेठ ग्रामीण परिवेश में माडा गांव के सरकारी स्कूल में मराठी मीडियम में 10वीं तक पढ़ाई की तो इसी दौरान यूपीएससी का सिविल सर्विसेज का एग्जाम क्लीयर कर आईएएस बनने का सपना देखा।
पिता जी द्वारा सिखाई एक आदत बनी मददगार…
पढ़ाई के दौरान एक बार बीडीएस और दूसरी बार एमटेक करने के लिए आईआईटी में एंट्रेस टेस्ट पास किया। पैरेंट्स की इच्छा थी कि मैं डॉक्टर बनूं। ताकि गांव के पास किसी शहर में रह कर डॉक्टरी करने के साथ अपनी पुश्तैनी खेती करवा सकूं। आईएएस बनना था तो न तो बीडीएस में एडमिशन लिया और न ही आईआईटी में। ग्रामीण परिवेश से होने की वजह से कभी कोचिंग करने का मौका नहीं मिला। आत्मविश्वास के साथ ही सेल्फ स्टडी पर जोर दिया। इस दौरान फोन से भी दूर रहा, ताकि तैयारी पर फोकस कर सकूं। हां, स्कूल टाइम में पिताजी द्वारा अखबार पढ़ने की सिखाई आदत मेरी लिए कंपीटिशन फाइट करने में मददगार बनी।
1st अटेम्प में ही बन गया IAS
समाचार पत्र और पत्रिकाओं के अलावा रोजाना 10 घंटे तक सिलेबस की किताबों को पढ़ता था। 2010 में महाराष्ट्र प्रशासनिक सेवा, राज्य वन सेवा और सेंट्रल पुलिस फोर्स में असिस्टेंट कमांडेंट पद पर सिलेक्शन हुआ। मेरा लक्ष्य आईएएस बनना ही था। इसी वजह तीनों में से कोई भी नौकरी ज्वाइन नहीं की। इसी दौरान महाराष्ट्र सरकार द्वारा बनाए 50 अभ्यर्थियों के बैच के साथ रहकर सेल्फ स्टडी के साथ सिविल सर्विसेज की तैयारी की। 2010 में एग्जाम दिया और पहले प्रयास में ही पास कर 2011 में सिविल सर्विस ज्वाइन की।
युवाओं के नाम संदेश
अच्छा काम करने की संभावनाएं हर जगह होती हैं। फील्ड चाहे कोई भी हो। बेहतरी और समर्पण भाव से काम करने से सफलता हासिल की जा सकती है।