देश – चंदू शर्मा 
लंबे समय से सेना के भीतर चल रही बुलेट प्रूफ जैकेट की कमी अब जल्द ही दूर हो जाएगी. 9 साल पहले किए गए अनुरोध के बाद रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को 639 करोड़ रुपये की लागत से 1.86 लाख बुलेटप्रुफ जैकेटों की खरीद के लिए एक रक्षा कंपनी के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किया. मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि कॉन्ट्रेक्ट को ‘सफल’ फील्ड परीक्षणों के बाद अंतिम रूप दिया गया.
 देश की रक्षा करने वाले सेना के जवानों को लंबे इंतजार के बाद बुलेट प्रूफ जैकट मिलने जा रही है। सेना की ओर से 9 साल पहले रक्षा मंत्रालय को बुलेट प्रूफ जैकेट का अनुरोध किया गया था। सोमवार को इस पर रक्षा मंत्रालय ने अपनी मंजूरी दे दी। अब रक्षा मंत्रालय 639 करोड़ रुपये की लागत से 1.86 लाख बुलेटप्रुफ जैकेटों की खरीदेगा। सोमवार को एक रक्षा कंपनी के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किया गया है।
मेक इन इंडिया के तहत किया गया है सौदा
रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी किए गए बयान में कहा गया है कि अनुबंध को ‘सफल’ फील्ड परीक्षणों के बाद अंतिम रूप दिया गया। अनुबंध स्वदेशी रक्षा उत्पादक एसएमपीपी प्राइवेट लिमिटेड ने हासिल किया है। इस सौदे को मोदी सरकार की मेक इन इंडिया योजना के तहत किया गया है। इस सौदे को घरेलू उद्योगों को बढावा दिए जाने की दिशा में बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।
2009 में सेना को थी 1.86 लाख जैकेटों की जरुरत
सरकार ने इस बात को स्वीकार किया कि साल 2009 में ही सेना को 1.86 लाख बुलेटप्रुफ जैकेटों की जरूरत थी, लेकिन ये पूरा नहीं हो सका। जैकेट के लिए कई बार कोशिश की गई लेकिन सेना द्वारा कराए गए ट्रायल में किसी भी कंपनी का बुलेट प्रूफ जैकेट पैमाने पर खरा नहीं उतरा, जिसके चलते जैकेट नहीं खरीदे जा सके। नई जैकेट पूरी तरह से अत्याधुनिक हैं और जवानों के शरीर को ज्यादा से ज्यादा कवर प्रदान करेगी।

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