Ntv Deepak tiwari

कोरेगांव – भीमा मामले में गिरफ्तार किए गए पांच कार्यकर्ताओं को राहत देने से इनकार करने वाले उच्चतम न्यायालय के शुक्रवार को आए फैसले में उनकी गतिविधियों तथा नक्सलियों एवं माओवादियों सहित प्रतिबंधित संगठनों से उनके कथित संपर्कों को लेकर उन पर पूर्व में दर्ज किए गये मामलों का विवरण भी दिया गया है। पूर्व में भी इन पांच में से तीन आरोपियों के विरूद्ध भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), शस्त्र अधिनियम और गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत दर्ज मामलों में अभियोजित किया गया था।
हालांकि, उनके खिलाफ दर्ज ज्यादातर मामलों में उन्हें सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया था शीर्ष न्यायालय में शुक्रवार को मानवाधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा, अधिवक्ता एवं पीयूसीएल से जुड़ी सुधा भारद्वाज, हैदराबाद निवासी कवि एवं राजनीतिक कार्यकर्ता वरवर राव, ठाणे निवासी वकील अरुण फरेरा तथा मुंबई निवासी लेखक वेरनन गोंजाल्विस की गिरफ्तारी के मामले की सुनवाई हुई।
मौजूदा मामले से पहले फरेरा 11 मामलों में आरोपी थे और सभी में बरी हो गए थे। न्यायमूर्ति एएम खानविलकर के अपनी और प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के बहुमत वाले फैसले को लिखा। इसके मुताबिक गोंजाल्विस पर 18 मामले थे जिनमें से 17 में उन्हें बरी कर दिया गया। एक मामले में अपील लंबित है।
वहीं, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड के लिखे अल्पमत वाले फैसले के मुताबिक गोंजाल्विस के खिलाफ पहले 19 मामले दर्ज थे और उन्हें 17 में बरी कर दिया गया। एक मामले में अपील लंबित है जिसमें वह दोषी ठहराए गए हैं। जबकि एक अन्य मामले में आरोप मुक्त किए जाने की एक अर्जी गुजरात उच्च न्यायालय में लंबित है। ।
वरवर राव के (79) के बारे में बहुमत वाले फैसले में इस बात का जिक्र किया गया है कि उनके खिलाफ 25 मामले दर्ज थे और वे सभी मामलों में बरी हो गए। वहीं, न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ के फैसले में यह संख्या 20 बताई गई है।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र पुलिस ने पिछले साल 31 दिसंबर को हुई एल्गार परिषद सम्मेलन के बाद राज्य के कोरेगांव – भीमा गांव में कथित तौर पर हिंसा होने को लेकर एक प्राथमिकी दर्ज की थी, जिस सिलसिले में 28 अगस्त को पांच कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था।

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