रिपोर्ट :- रामा नन्द तिवारी..
लोकेशन :- रानी बाग़, दिल्ली
पिछले दिनों नॉर्थ वेस्ट दिल्ली के रानीबाग थाने में 6 पुलिसकर्मियों और थाने के एसएचओ पर कार्रवाई करते हुए लाइन हाजिर किया गया था। लेकिन अब उस मामले में नया मोड़ सामने आया है । दरअसल एक भाजपा के पदाधिकारी व उसके परिवार के दो लड़कों की पिटाई का आरोप इन पुलिसकर्मियों पर था और SHO पर आरोप था कि उन्होंने उचित कार्यवाही नहीं की। इसके बाद इन सब पुलिसकर्मियों पर विभागीय कार्यवाही की गई। और खबर ने भी काफी तूल पकड़ा था। बरहाल अभी भी पुलोस की जांच जारी है। लेकिन आरोपी बनाए गए पुलिसकर्मियों के सबूतों और आरोपो को के बाद मामला कुछ और ही नज़र आ रहा है।
वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि 3-4 लोगो और कुछ पुलिसकर्मियों के बीच झड़प हो रही है। उक्त मामले में अब सामने आया है कि मामले के आरोपी पुलिस कर्मी कुछ वीडियो सामने लेकर आए हैं पुलिस कर्मियों का कहना है कि उनका पक्ष नहीं जाना गया ना ही उन्हें पक्ष रखने का मौका दिया गया। कहीं ना कहीं इनका कहना है कि राजनीतिक दबाव में पुलिस कर्मियों को बचाव का मौका ही नहीं दिया गया, न ही पक्ष रखने का अवसर दिया गया।  निलंबित पुलिसकर्मियों ने बताया है कि एक स्कूटी 2 दिन से रानी बाग थाने के पास में गली में लावारिस खड़ी थी जब उसको उठाकर थाने में लेकर आए तो परिवार के कुछ लोग आए और पुलिसकर्मियों के साथ गाली गलौज करने लगे यहां तक कि पुलिसकर्मियों पर अटैक करने के लिए बार बार कोशिश कर रहे थे । कुछ पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की भी की जिसका वीडियो कुछ पुलिसकर्मियों ने बनाया था जिस वीडियो में एक शख्स उन दोनों लड़कों के साथ आया है और बार-बार छुड़वाकर पुलिस-कर्मियों पर अटैक करने की कोशिश करता हुआ वीडियो में साफ नजर आता है। साथ ही पुलिसकर्मि का आरोप है कि वीडियो में दिख रहे व्यक्ति ने थाने में अपने राजनीतिक रसूख की धमकियां दी, और हर कीमत पर पुलिसकर्मियों पर कार्यवाही करवाने की बात भी कही साथ ही कहा कि इससे पहले भी वो एक अन्य थाने के SHO पर भी कार्यवाही करवा चुका है।
 सस्पेंडेड पुलिसकर्मी
मोबाइल में अपने ही वीडियो बनती देख वह दोनों लड़के उस युवक को रोक लेते हैं वीडियो में देखकर नजर नहीं आ रहा कि इन लोगों की पुलिसकर्मियों ने पिटाई की होगी वह भी इतनी बेरहमी से कि साथ-साथ पुलिस कर्मचारियों को निलंबित कर दिया जाए । अब आसपास के दूसरे लोगों का और जानकारों का भी कहना है कि वह स्कूटी वहां पर लावारिस थी और पुलिस कर्मियों के साथ गलत कार्रवाई की गई है। हालाँकि इस किसी भी स्थानीय निवासी ने केमरे पर बात नही की।
सस्पेंडेड पुलिसकर्मी।
बरहाल पुलिस ने हो सकता है ऐसा राजनीतिक दबाव में किया हो लेकिन कहीं ना कहीं ऐसे मामलों में जवानों का मनोबल भी टूटता है । जरूरत होती है कि पुलिस के आला अधिकारी ऐसे मामलों में जवानों का पक्ष भी जाने । क्योंकि बिना पक्ष जाने कार्यवाही करने से जवानों का हौसला टूटता है जिससे आगे किसी भी मामले पर कार्यवाही करने से भी खुद पुलिसकर्मी भी डरेंगे। पर अब जरूरत है कि इस पूरे मामले की गहनता से निष्पक्ष जांच हो ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके और सच्चाई सबके सामने आए।

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