प्रतापगढ़।उत्तर प्रदेश उप निरीक्षकों का स्थानांतरण करने से अपराध पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता है अपराध तक काम आता है जब अधिकारी व कर्मचारी दोनों अपने कार्यों पर तत्पर तैयार रहें उस समय पर सारी व्यवस्थाएं हो सके आए दिन स्थानांतरण के सिवा और कोई सेवा नहीं सुनाई पड़ती चाहे पुलिस सही रिपोर्ट लगाएं चाहे गलत रिपोर्ट लगाएं घटनास्थल सही हो चश्मदीद गवाहों तब पर भी शिक्षकों की कमी दिखा करके धाराओं में कमी करके किसी ना किसी तरीके से आरोपियों को शांतिपूर्वक आरोपपत्र से नाम निकाला जाता है न्यायालय तब संज्ञा लेता है जब वही गवाह न्यायालय में गवाही दे कर आता है और मुलजिम का नाम बताता है तब न्यायालय दरोगा जी से और गवाहों से दोनों के बयान के आधार पर नाम निकाले हुए आरोपी को दाखिल किया जाता है और वह अपनी जमानत कर आता है या कोई नया मामला नहीं है आए दिन संगीन वारदात में शामिल आरोपियों को आप कभी भी देखिए उनके चमचे थानों चौकियों एवं कचहरी में घूमते रहते हैं और अपराध करने के उपरांत उपरे जुगाड़ में लग जाते हैं यूपी हंड्रेड की बोलेरो एवं पल्सर लाख कोशिश करें हंड्रेड डायल मौके पर नहीं पहुंचती पहुंचती कब है जब या तो कोई मर जाता है या कोई बड़ी घटना हो जाती है पहुंचने के बावजूद भी कार्रवाई करने से कतराते हैं इवेंट पर फर्जी सूचना दे दी जाती है कि विवाद आपसी था इस तरह का कोई विवाद नहीं पाया गया थाने ले जाते हैं उसके बाद वहां भी मदद गीत एवं थानों के चमचे शिफारस में ले दे कर के किसी न किसी तरीके से मैनेज करते हैं अंततः रिपोर्ट के आधार पर 151 या 17 16 की कार्रवाई की करके अपना पल्ला पुलिस झाड़ लेती है जब कोई अधिकारी पूछता है तो बताने पर बता देते हैं कि सर इसमें एक साथ सुलाया 151 की कार्रवाई की जा चुकी है शांति व्यवस्था हेतु कार्रवाई की गई है इससे सच्चाई का पता नहीं लग पाता सच्चाई का पता कब लगता है जब पुलिस विभाग स्थलीय निरीक्षण करके गवाहों के साथ रिपोर्ट लगाएं एवं बयान दर्ज कराएं तब आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करें तब तो कोई कार्रवाई की जा सकती एक साथ 16 से पूरी कभी नहीं होती

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