बिजनेस डेस्कः अमेरिकी साइबर सिक्यॉरिटी फर्म साइफर ट्रेस ने कहा कि साल 2009 से क्रिप्टोकरंसी एक्सचेंजों ने 2.5 अरब डॉलर (करीब 180 अरब रुपए) मूल्य के बिटकॉइन की लॉन्ड्रिंग की। इन क्रिप्टोकरंसी एक्सचेंजों का ठिकाना भारत से बाहर है, जो भारत से मनी लॉन्ड्रिंग को बढ़ावा दे रहे हैं क्योंकि उन्हें प्रभावित करने वाला कोई स्पष्ट मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी कानून अस्तित्व में नहीं है। 180 अरब रुपए में वही लेनदेन शामिल हैं जिनपर साइफर ट्रेस की सीधी नजर थी और जिसे उसने आपराधिक या अति संदेहास्पद माना है।

साइफर ट्रेस ने टॉप 20 क्रिप्टोकरंसी एक्सचेंजों के जरिए हुए करीब 35 करोड़ के लेनदेन की पड़ताल की और 10 करोड़ ट्रांजैक्शंस के मिलान दूसरे पक्षों से भी किए। इन एक्सचेंजों का इस्तेमाल आपराधिक सेवाओं के लिए 2 लाख 36 हजार 979 बिटकॉइन्स की खपत के लिए हुई थी। साइफर ट्रेस ने मनी लॉन्ड्रिंग के अलावा हैकिंग और क्रिप्टोकरंसीज की चोरी का भी पता लगाया। साल 2018 के पहले नौ महीनों में हैकिंग एक्सचेंजों के जरिए 92 करोड़ 70 लाख डॉलर (करीब 68 अरब रुपए) मूल्य की वर्चुअल करंसी की चोरी हुई थी जो पिछले वर्ष की तुलना में 250 फीसदी ज्यादा थी।

 

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