दीपक तिवारी

भाजपा सरकार में सूचना आयुक्त रहे शिवराज के चहेते पूर्व कलेक्टर हीरालाल त्रिवेदी सपाक्स के संस्थापक और वर्तमान अध्यक्ष हैं! जनता को सूचना का अधिकार देकर कांग्रेस ने सरकारों को पारदर्शी बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाया मगर भाजपा सरकारें हमेशा राह में रोड़ा ही बनी रहीं!
हीरालाल भी शिवराज के वो हीरा हैं जिन्होंने सूचना आयुक्त रहते भाजपा सरकार के सामने कभी कोई संकट नही खडा होने दिया! इसमें कोई शक नही कि शिवराज वह मदारी है जिसने थोथी घोषणाओं का डमरू बजा कर जनता को पंद्रह वर्ष तक तरह तरह के खेल में उलझाए रखा !
जनता का ध्यान कभी घोटालों , अवैध कारोबार या वैट के अतिभार की तरफ नही गया! मगर शिवराज की चौथी पारी पर संकट के काले बादल मंडरा रहे हैं!
जनता का मन अब मदारी से खिन्न हो गया है लोगों की नजर में शिवराज के डमरू में वो दम नही रहा वो घिसे पिटे खेल से ऊब चुकी है !
रही सही कसर मोदी के शाही फैसलों ने पूरी करदी आवाम सूबे में बदलाव चाहती है! भाजपा का नाम लेना तो दूर कोई सुनना भी नहीं चाहता है! ऐसे में मुखिया को अपने हीरा की फिर याद आई! मंत्रणा हुई शातिर प्लान बना और जनता को षडयंत्र में फंसाने शिवराज ने सपाक्स रूपी चाल चली और कमान हीरालाल के हांथों सौंपदी!
एससी-एसटी एक्ट से नाराज़ सवर्णों को कांग्रेस के खेमे में जाने से रोकना सपाक्स का मूल उद्देश्य है! आपने देखा होगा मोदी ने अदालती फैसले को अध्यादेश लाकर जब बदला तो सवर्णों का गुस्सा भाजपा के खिलाफ फूट पडा जिसका आंकलन भाजपा को भी नही था! चुनाव सिर पर और हालात बिगाड़ रहे हैं यह देख बहरूपिए शिवराज से रहा नही गया!
शिवराज ने मुखिया की तरह अपने हीरा को पदच्युत होने के बाद फिर तलब किया! और सवर्णों के विरोध को एक दिशा देने का काम किया दिया ! अभी तक महज भाजपा नेताओं का ही विरोध हो रहा था मगर कमान सम्हालते ही कांग्रेस नेताओं का विरोध भी किया जाने लगा!
ताज्जुब की बात है सपा बसपा दसकों से मप्र में राजनीति कर रही हैं मगर ऐसे सक्रिय कार्यकर्ता आज तक नही खोज पाई जैसे सपाक्स में नजर आए! आप यदि गौर करेंगे तो पाएंगे कि सपाक्स में स्थानीय स्तर पर वही नेतृत्व कर रहे हैं जिनके गले में कल तक भगवा गमछा था!
विस्वास मानिए वह गमछा चुनाव तक सुनियोजित तरीके से कंधे से उतार कर घर की खूंटी में सुरक्षित टांग दिया गया है! इस खेल में अन्य राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता भी फंस रह हैं!
मै पूछना चाहता हूं हीरालाल त्रिवेदी से आपका ब्रम्हणत्व तब क्यों नहीं जागा जब दलितों को शिवराज के द्वारा मंदिरों का पुजारी घोषित कर दिया गया था!
मै जानना चाहता हूं शिवराज से कि उस करणी सेना से आज तुम्हारा मोंह क्यों भंग हो गया जिसका पहला झंडा तुमने छाती ठोक कर उठाया था!

आइएएस होना कोई ईमानदारी का प्रमाणपत्र नहीं है! देश की जनता आज नेताओं से उतना त्रस्त नही है जितना इस लालफीताशाही को हांक रहे ोटी चमड़ी के ऐसे संवेदनहीन अधिकारियों से आजित है!
मेरी जनता से अपील है चुनाव तक दिमाग खुला रखिए और सोचिए हम सपाक्स का समर्थन क्यों करें क्या ये सरकार बनाने जा रहे हैं नही जब सपा बसपा कांग्रेस से गठबंधन न होने की स्थिति में खुद को सत्ता से बाहर मान कांग्रेस को कोस रही हैं तो सपाक्स क्या है !?
महज वोटकटुआ पार्टी जिसे मुखिया का वह हीरा चला रहा है जो केंद्र में मंत्री बने पूर्व सेनाध्यक्ष बीके सिंह राज्यपाल बनी किरन बेदी बीसीसीआई बोर्ड का सर्वेसर्वा बना पूर्व कैग प्रमुख की तरह भाजपा सरकार में कहीं सुशोभित होने के ख्वाब देख रहा है!

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