लखनऊ सुलतानपुर से स्टेट हेड एन टी वी टाइम भानू मिश्रा उत्तर प्रदेश की सुलतानपुर के पंचायत उद्योग का भ्रष्टाचार , विभाग के अधिकारियो की सरपरस्ती मे बना धनउगाही का जरिया पर विशेष रिपोर्ट:-
विभागीय अधिकारियों की सरपरस्ती, पंचायत उद्योग का भ्रष्टाचार बना धनउगाही का जरिया
सुल्तानपुर! जनपद के अंतर्गत विकास खंड दुबेपुर वर्ष 2015 से संचालित हो रहा सेनेटरी नैपकिन सेंटर जिले मे अधिकारियों के लिए धन उगाही का जरिया साबित हो रहा है!
      सूत्र बताते हैं कि यह सेंटर जिला पंचायतराज अधिकारी डीपीआरओ के नेतृत्व में 2015 से शासन की मंशानुसार महिलाओं को रोजगार देने की नीयत से डाला गया था, शाशन ने लाखो रुपए खर्च कर इस सेंटर पर आठ इलेक्ट्रॉनिक मशीन देकर सेंटर की शुरुआत कराया गया था! पूर्व सेक्रेटरी रूबी साहू ने 10 महिलाओ से काम शुरू कर दिया गया, और धीरे धीरे बिल्डिंग का निर्माण भी हुआ! वर्ष 2017 મેં जब शासन द्वारा बिल्डिंग के लिए 18.81 लाख की धनराशि स्वीकृत की गई तो संबंधित विभागीय अधिकारियों की नीयत खराब हो गयी, तत्कालीन डीपीआरओ अरविंद द्वारा अपने कामउपूत कर्मचारीयो के कहने पर तत्कालीन सीक्रेटरी रूबी साहू को हटाकर संगीतपाल को चयनित कर दिया, तथा शासन से आए 18.81 हजार रुपये को इनके खाते में डाल दिया!
     हद तो इस बात पर होती है की अगस्त 2017 મેં जिसदिन से संगीतपाल द्वारा सेंटर का चार्ज लिया गया है उसदिन से लेकर आजतक कितने दिन और कितने घंटे इन्होने सेंटर पर समय दिया, वहां कितने लोग महीने में कितने दिन कितने बजे से कितने बजे तक काम किया है, तैयार माल की सप्लाई किसके द्वारा कहा कहा, कितना कितना और कब किया गया है अगर संगीतपाल से पूछा जाएँ तो नहीं बता सकती है! इसके पीछे का कारण यह है कि संगीतपाल द्वारा जबसे सेंटर का चार्ज लिया गया है, शायद ही 2 या 3 दिन सेंटर पर गई होंगी, बाकी दिन सूत्र बताते है कि इनकी नौकरी का सारा डाईत्व इनके पतिदेव माननीय चंद्रभान पाल द्वारा निभाया जाता है! चंदभान पाल भी किसी मायने में इनसे पीछे नहीं है वो भी सेंटर पर खुद ना जाकर तेरसराम पाल नाम के एक आदमी को महज इसलिए सेंटर पर रखे हुए हैं कि अगर कोई अधिकारी या मीडिया वाले आए तो उनतक सूचना पहुंचाकर यह कह दिया जाय कि सीक्रेटरी मेडम आई थी अभी तक थी, अभी गई है! सूत्र बताते हैं कि तेरसराम भी दिन में मात्र एक दो घंटे के लिए ही आते हैं बाकी सेंटर की चाभी वहां काम करने वाली महिलाओं को थमाकर गायब रहते हैं!
     सोचनीय बात तो यह है कि बीते दिनों हमलावर न्यूज़ अखबार संपादक व उनकी टीम हकीकत से रूबरू होने के लिए जब दुबेपुर स्थित अकारीपुर सेनेटरी नैपकिन सेंटर पर पहुची, तो वहां का नजारा देखने लायक था! एक बड़े से हाल कमरे में मात्र दो महिला संजू व अनीता बैठकर पैड बना रही थी! टीम ने जब उनसे पूछा कि यहां कितने लोग काम करते हैं तो उनके द्वारा बताया गया कि तीन लोग काम करते हैं दो हमलोग व तीसरे रामपाल जो है नहीं, कही गए हैं! टीम ने उनसे जब उपस्थित रजिस्टर के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हम लोगो से कभी हाजिरी नहीं लिया जाता है इसके बारे में हम कुछ नहीं जानते!
    ऐसे में जरा आपही सोचिए कि जिस संस्था में काम करने वाले लोगों के न आने का समय मालूम, न जाने का, और न ही उपस्थिति रजिस्टर पर उपस्थित होने का कोई सबूत और न ही वहां तैनात अधिकारी का कोई अतापता, अब ऐसे में उस सेंटर का क्या हाल होगा, शासन की मंशा किस तरह पूरी की जा रही होगी, आप स्वयं सोच सकते हैं!
    ऐसा नहीं है कि इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को नहीं है, बल्कि सबकुछ जानते हुए भी जिले के जिम्मेदार महज अपनी कलम इसलिए नहीं चलाना चाहते हैं कि उस सेंटर की अवैध धनउगाही में इनका भी हिस्सा होता है! जिसका जीता जागता सबूत यह है कि शासन से आए 18.81 हजार रुपए कहा और किस मद मे खर्च किया गया है बताने वाला कोई नहीं है! સૂત્રો की अगर माने तो सीक्रेटरी द्वारा प्रतिमाह अवैध कमाही का 50 प्रतिशत विकास भवन के अधिकारियों व कर्मचारियों को दिया जाता है यही कारण है कि लाख शिकायतों के बावजूद उच्चाधिकारियों की निगाह उधर नहीं उठती, आखिर उठे भी क्यो, बैठे बिठाए कौन चाहेगा कि उसकी प्रतिमाह लाखो की आमदनी से उसे हाथ धोना पड़े, वाह रे up सरकार और उनकी सरकार के नौकरशाह तेरा जवाब नहीं!

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