दीपक तिवारी

इंदौर इस बार का विधानसभा चुनाव नीरस, बोर और अबोझ नहीं होगा। भले ही कांग्रेस अपनी गति में धीमी पड़ गई हो, लेकिन अब दूसरे दलों ने प्रदेश की हलचलें तेज कर दी हैं। एक तरफ जहां कथावाचक देवकी नंदन ठाकुर ने अपनी पार्टी बनाने की घोषणा कर दी हैं, वहीं शुक्रवार को सपाक्स ने भी अपनी नई पार्टी बना दी है। सपाक्स तो बाकी पार्टियों से दो कदम आगे निकली और अपने कुछ प्रत्याशियों के नामों की सूची भी जारी कर दी है।
राजनीति की एबीसीडी सीखने वाली सपाक्स पार्टी ने शुक्रवार को घोषणा करते हुए सबको चौंका दिया है, क्योंकि पार्टी ने बाकी दलों को पीछे छोड़ते हुए अपने उम्मीद्वारों के नामों की घोषणा कर दी है। सपाक्स के एलान के बाद तय हो गया है कि एमपी की कुछ सीटों पर घमासान होना है। कई जगहों पर दिग्गजों की हार-जीत दांव पर लगी रहेगी।
अपने क्षेत्र  में पकड; वाले प्रत्याशी शामिल : सूची में रिटायर्ड आईएएस अफसर वीणा घाणेकर, सुधा चौधरी, विजय वाते, सुरेश तिवारी के नाम की चर्चा है। टिकट देने में उन अफसरों को प्राथमिकता दी जा रही है जिनकी उस इलाके में मजबूत पकड है। सपाक्स की तैयारी कुछ पुजारियों और कर्मचारी नेताओं को भी चुनाव मैदान में उतारने की है, जिन इलाकों में ब्राह्मण वोट ज;यादा हैं, वहां से वो पुजारियों को टिकट देने का मन बना रही है। उम्मीदवारी की कतार में कुछ कर्मचारी नेताओं के नाम भी हैं।
आर्थिक आधार पर आरक्षण की पक्षधर : विधानसभा चुनाव में पूरे दम-खम से मैदान में उतरने की तैयारी कर रही सपाक्स पार्टी ने आरक्षण के मुद्दे पर अपने पत्ते खोले हैं। पार्टी ने कहा है कि वह आरक्षण की वर्तमान व्यवस्था के खिलाफ है और आर्थिक आधार पर आरक्षण की पक्षधर।
पार्टी कहती है कि सुप्रीम कोर्ट भी स्पष्ट कर चुका है कि अनुसूचित जाति-जनजाति में क्रीमीलेयर तय करना होगा। पार्टी के अध्यक्ष डॉ. हीरालाल त्रिवेदी कहते हैं कि सपाक्स सभी वर्गों में समानता की पक्षधर है और सभी के लिए आर्थिक आधार पर आबादी के मान से 50 फीसदी (अनुसूचित जाति 8 फीसदी, जनजाति 10 फीसदी, पिछड़ा वर्ग 23 फीसदी और सामान्य वर्ग 9 फीसदी) की निर्धारित सीमा में आरक्षण की बात करती है

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