दीपक तिवारी

इंदौर के होलकर स्टेडियम में होने वाला क्रिकेट मैच अचानक रद्द हो गया। वजह थी फ्री पास की। बीसीसीआई कुछ ज्यादा ही पास मांग रहा था, जबकि एमपीसीए कम देने को तैयार था। विवाद पास का नहीं है जनाब, विवाद तो रईस जादे भिखमंगों का है। पास ऐसे लोगों के लिए मांगा जा रहा था, जो खुद क्रिकेट के टिकट खरीदने में सक्षम होते हैं। ऐसे वीवीआईपी जो किसी भी कीमत का टिकट खरीद सकते हैं। जब आप उन्हें वीवीआईपी मान ही लेते हैं तो क्या वे टिकट नहीं खरीद सकते। खरीद सकते हैं जनाब, लेकिन उनकी तो आदत बिगड़ी हुई है। ऐसी आदत बिगड़ी है, जैसी कल के वीडियो में खंडवा के बूढ़े बीजेपी सांसद नंदकुमार सिंह चौहान की दिखी।  टोल टेक्स न चुकाने की दादागिरी पर वे टोलकर्मी को मारने पर उतारू हो गए। होना क्या था नंदू काका को कैमरे नहीं दिखे और टोलकर्मी को थप्पड़ जड़ दिए। ये ऐसे ही रईस जादे हैं जो खरीद सबकुछ सकते हैं, लेकिन रुपए देना नहीं चाहते। वैसा ही आदत बीसीसीआई और एमपीसीए ने कर रखी है।
विजय शाह भी उदाहरण है
पिछली बार भाजपा के मंत्री विजय शाह की भी स्थिति आपने देख ली थी। क्रिकेट मैच देखने आए शाह भी उस वक्त चिढ़ गए, जब उन्हें वीआईपी ट्रीटमेंट नहीं मिला। खसियानी बिल्ली ने आखिर खंबा नौचा और अगले ही दिन स्टेडियम के पास के स्कूल की दीवार बंद करवा दी।
दोस्तों, खबर इंदौर सीधे नब्ज पर प्रहार कर रहा है। हम किसी की खिल्ली उड़ाना नहीं चाहते, लेकिन ये देश में ऐसे कई उदाहरण देखने को मिल जाएंगे, जो दौ कौड़ी की हरकत कर जाते हैं। क्या आपको नहींं लगता कि ये नेता -वीआईपी गलत कर रहे हैं। यदि लगता है और आपके पास कोई वीडियो, ऑडियो या फोटो हैं तो तत्काल हमें भेजे। हमें पड़ताल के बाद उसे प्रकाशित करेंगे और सीधे जनता को दिखाएंगे

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