धीरु सिंह
जेपीपुरम बेला रीवा स्थित अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी के द्वारा फैलाई जा रही कोयले के प्रदूषण को रोके जाने के संबंध में मधेपुर के किसानों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर मांग की थी कि सीमेंट कंपनी द्वारा फैलाए जा रहे कोयले के प्रदूषण के कारण फसल की पैदावार समुचित नहीं पाती जिससे कृषि कार्य में हानि हो रही है होने वाली हानि की क्षतिपूर्ति सीमेंट कंपनी द्वारा नहीं की जाती इसलिए खेत में जाने वाले कोयले के प्रदूषण को पूर्णरूपेण रोका जाना चाहिए उच्च न्यायालय की एकलपीठ ने याचिका सुनवाई करते हुए अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी को आदेशित करते हुए पूर्व में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश जारी किए हैं मध्देपुर निवासी रामलाल सिंह,प्रकाश नारायण सिंह,भीम सिंह, अजय पाल सिंह,रामसुंदर सिंह,राम सिंह निवासी छिजवार ने उच्च न्यायालय में याचिका क्रमांक 6879/2018 दायर कर माननीय न्यायालय से मांग की थी,कि हम लोगों के भूमि खसरा क्रमांक 635,636रकवा16एकड़41डिसमिल ग्राम मधेपुर एवं भूमि खसरा क्रमांक 122 126 रकबा 5 एकड़ 57ढिसमिल भूमि अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी जेपी पुरम से लगी हुई है।

जहां कंपनी द्वारा कोयले ऑयल आदि का प्रदूषण छोड़ा जाकर कृषि योग्य भूमि को बंजर के रूप में परिवर्तित कर रहे हैं,काफी मात्रा में फैलाये जा रहे डस्ट एवं कोयले के प्रदूषण के कारण बोई गई फसल नहीं हो पाती है,जिसका मुआवजा सीमेंट कंपनी द्वारा हर सीजन में भुगतान किया जाना चाहिए लेकिन फैक्ट्री प्रबंधन की तानाशाही के चलते होने वाले नुकसान का मुआवजा भुगतान नहीं किया जाता याचिका की सुनवाई करते हुए विद्वान न्यायाधीश सुबोध अभ्यकंर की एकलपीठ ने आदेश जारी करते हुए अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी के साथ ही साथ मध्य प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव अनुविभागीय दंडाधिकारी तहसील हुजूर एवं जेपी रीवा सीमेंट कंपनी को आदेशित करते हुए कृषि भूमि में प्रदूषण न फैले इस हेतु यथास्थिति पूर्व की भांति बनाए रखने के आदेश दिनांक 26 मार्च 2018 को जारी किए।
याचिकाकर्ताओं ने बताया कि

उक्त सीमेंट कंपनी के विरुद्ध पर्यावरण एवं प्रदूषण के संबंध में स्थानीय जनसमस्या समिति द्वारा 2006 में एक याचिका उच्च न्यायालय में दायर की गई थी जिससे सुनवाई के लिए प्रकरण को एनजीटी के पास भेजा गया जो अभी लंबित चल रही है कंपनी के प्रबंधकों द्वारा पर्यावरण एवं प्रदूषण के संबंध में विधि सम्मत कार्यवाही नहीं की जाती जिससे प्रभावित गांवों के नागरिकों को गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं जिससे जहा शरीर नष्ट होता है वही लोगों का पैसा भी उपचार में निरर्थक बह रहा है देखना है कि उच्च न्यायालय के आदेशों का पालन होता है या उस आदेश को भी रद्दी की टोकरी में प्रबंधन फेंक देता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here