विजय कुमार शर्मा प,,च,बिहार
इंडो नेपाल बॉर्डर के बाल्मीकिनगर में -नववर्ष की भांति इस बार पहली बार देखने को मिला कि पिकनिक मनाने वाले को बाल्मीकि टाईगर रिजर्व के द्वारा प्रचार-प्रसार करते हुए सभी को सख़्त हिदायत देते हुए कहा गया कि इस बार आने वाले पर्यटकों को जंगल के अंदर पिकनिक नही बनाने के साथ ही गीत-संगीत के साथ  शोरगुल पर जंगल-विभाग ने प्रतिबंध लगाया गया है। लेकिन प्रतिबंध लगाने केबावजूद भी इस बार यह देखा गया कि बाल्मीकिनगर से सटे सीमावर्ती  झेत्र बिहार और यू.पी से भी सटे अन्य क्षेत्रों से भी अपने-अपने सवारी के साथ पर्यटकों का आने-जाने का सिलसिला थमने का नाम ही नही ले  रहा था और आने-वाले पर्यटकों  को जहा भी जगह दिखाई दे, वही अपने परिवार के साथ नये साल के आगमन पर खुशियों के पल बिताने के साथ कई पर्यटक जंगल-सफ़ारी का लुफ़्त उठा रहे तो कोई साइकिल यात्रा का लुफ़्त उठा रहे, कोई पर्यटक जंगल-झुला का लुफ़्त उठा रहे, कोई पर्यटक हिरण का लुफ़्त उठा रहे, कोई पर्यटक ई-रिक्शा से गंडक बराज से सटे नेपाल में बने हुए शीश-महल के साथ गर्ज-ग्राह का लुफ़्त उठा रहे थे। पर्यटकों ने बताया कि ऐसा पहली बार देखने को मिला है और पर्यटकों ने बताया कि बाल्मीकिनगर कई बार आये है घूमने के लिए परन्तु इस बार तो बाल्मीकिनगर का दर्शन तो ऐसा कुछ अलग लग रहा है और हमलोगों को शायद ऐसा लग रहा कि माने कि “चाँद के पार चलो” हमलोग किसी का दीदार करने आये है। जंगल-विभाग के पाबंदी लगाने के बाद भी हमलोग नदी के किनारे बैठ कर अपने परिवार के साथ खुशियों बाँट कर जंगल कैम्प में हाथी-ग्रह के साथ वाच-टावर, जंगल-सफ़ारी का आनंद ले रहे है और शायद चम्पारण के धरती पर शायद ऐसा पहली बार ऐसा पर्यटक देखने को मिला है।

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