शाजापुर (निर्मल)
जिले में खाने-पीने की चीजों की गुणवत्ता की जांच के लिए जाने वाले सैम्पलों की जांच के बाद आखिरकार 4 माह बाद रिपोर्ट आने का दौर शुरू हुआ है। इस साल लिए गए सैम्पलों की रिपोर्ट नहीं आ पाने से संबंधित व्यवसायी अब तक असमंजस में थे। ऐसे में अब भोपाल स्थित राज्य प्रयोगशाला से थोक बंद 23 रिपोर्ट आ चुकी हैं। इनमें से नमकीन, लडडू, मावा, बर्फी सहित 10 सामग्रियों के नमून फेल हो गए हैं।
आम लोगों को खाद्य एवं पेय पदार्थ बेहतर गुणवत्ता के मिलते रहे, इसका जिम्मा खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग पर रहता है। इसके लिए बकायदा खाद्य सुरक्षा अधिकारी दुकान-दुकान जाकर सैम्पल लेते हैं। लिए गए सैम्पलों को जांच के लिए राज्य प्रयोगशाला भोपाल भेजा जाता है। जहां से रिपोर्ट में यदि नमूना सही पाया गया तो ठीक। वहीं यदि नमूना फेल हुआ तो नियमानुसार उसे कोर्ट या एडीएम कोर्ट में प्रस्तुत किया जाता है। जहां से सजा, जुर्माना आदि का प्रावधान है।
जिले में एक तरफ जहां इमानदारी से अपना व्यवसाय करने वाले व्यवसायी हैं तो दूसरी ओर कुछ व्यवसायी भी ऐसे भी हैं, जो था़ेडे मुनाफे के चक्कर में घटिया क्वालिटी का माल थमा देते हैं लेकिन जब खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा जांच के दौरान सैम्पलिंग की जाती है तो दूध का दूध व पानी का पानी हो जाता है।
अब तक कुल 23 जांच रिपोर्ट आई है, जिसमें से 10 रिपोर्ट फेल आई है। जानकारी अनुसार 30 जनवरी को शुजालपुर सिटी से लिए गए खारक का सैम्पल फेल हो गया। 8 फरवरी को अकोदिया से लिया गया न्यू जैन नमकीन का सैम्पल, दही, लाल मिर्च, 13 मार्च को शुजालपुर मंडी से लिए गए लाल मिर्च पावडर के 2 सैम्पल, 27 मार्च को अकोदिया से लिए गए मलाई टिक्की, मगज लड्डू व मावा बर्फी एवं 27 अपै्रल को कालापीपल से लिया गया मावे का नमूना फेल हो गया। असुरक्षित निकले लाल मिर्च पावडर के नमूने
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के पास जिन खाद्य सामग्रियों के फेल होने की रिपोर्ट आई उसमें सबसे ज्यादा दिक्क्त लाल मिर्च पावडर को लेकर है। दरअसल, दूसरी सामग्रियों के नमूने जहां सब स्टैंडर्ड, मिस ब्रांडेड आए हैं, जबकि मिर्च पावडर के नमूने अनसेफ आए हैं। अनसेफ सामग्री सेहत के लिए सबसे ज्यादा नुकसान देह होती है। इस तरह की सामग्री बेचने वालों को कानूनन जेल की सजा का प्रावधान है।खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा लिए जाने वाले सैम्पलों को जांच के लिए भेजे जाने के बाद अमूमन 25 दिन में रिपोर्ट आ जाती है। संबंधित व्यवसायी जल्द से जल्द जांच रिपोर्ट आने का इंतजार करते हैं। रिपोर्ट फेल होगी या पास इसके बारे में उन्हें चिंता जरूर रहती है लेकिन इस साल तो जो सैम्पल खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने लिए उनकी जांच रिपोर्ट मई माह के अंतिम दिनों में आई है। उल्लेखनीय है कि दीपावली या अन्य कोई बड़ा पर्व होने पर जरूर वहां सैम्पलों की जांच का दबाव रहता है। इसके कारण जांच रिपोर्ट कुछ देरी से आती है। फिलहाल इस तरह का कोई स्थिति नहीं रही। बावजूद इसके इतने माह बाद रिपोर्ट आई है।
        जिले की विभिन्न दुकानों से लिए गए सैम्पलों की जांच रिपोर्ट आ चुकी है। कुल 10 नमूने फेल हुए हैं। जिन्हें निमयानुसार कोर्ट व एडीएम कोर्ट में प्रस्तुत किया जाएगा। इसके लिए तैयारी चल रही है।
   आर.के. कांबले खाद्य सुरक्षा अधिकारी शाजापुर

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