विकास वर्मा हरियाणा ब्यूरो चंडीगढ़।

हरियाणा के आइपीएस अधिकारी नहीं चाहते कि उनकी संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक किया जाए। आइएएस अधिकारियों में भी इसे लेकर दो राय है। कुछ आइएएस अधिकारी अपनी संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करने के पक्ष में हैैं तो कुछ ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए खुला विरोध जताया है। राज्य के 36 आइएएस अधिकारियों को अपनी संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करने में कोई एतराज नहीं है, जबकि 33 आइएएस अधिकारियों ने साफ मना कर दिया कि उनकी संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए।

राज्य के आइएएस और आइपीएस अधिकारियों की संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक करने से जुड़े नौ साल पुराने केस की महत्वपूर्ण सुनवाई 26 जून को राज्य सूचना आयुक्त योगेंद्र पाल गुप्ता और हेमंत अत्री की दो सदस्यीय खंडपीठ करेगी। राज्य सूचना आयोग ने इसके लिए कार्मिक विभाग के अंडर सेक्रेटरी, डीजीपी कार्यालय के अधीक्षक, पुलिस मुख्यालय के एसपी (कानून व्यवस्था)  व अपीलकर्ता समालखा (पानीपत) निवासी पीपी कपूर को 26 जून को चंडीगढ़ तलब किया है।

पीपी कपूर द्वारा मांगी गई जानकारी से जुड़ी याचिका पर तत्कालीन 69 में से 36 आइएएस ने अपनी संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करने की सहमति सन् 2010 में सरकार को दे दी थी। 33 आइएएस के मना करने के बाद से यह केस राज्य सूचना आयोग में लंबित पड़ा है। कपूर ने बताया कि 16 दिसंबर 2009 को मुख्य सचिव को आरटीआइ आवेदन भेजकर आइएएस, आइपीएस, एचपीएस और एचसीएस अफसरों की संपत्ति का ब्योरा मांगा था।

डीजीपी कार्यालय ने खड़े किए हाथ, खेमका, दास और उमाशंकर साथ

पुलिस मुख्यालय ने तो इस सूचना को देने से स्पष्ट मना कर दिया था, जबकि हरियाणा सरकार ने सभी आइएएस अफसरों से उनकी राय मांगी थी। आइएएस अशोक खेमका, समीर माथुर, उमाशंकर, पीके दास, टीके शर्मा, बलबीर मलिक, डॉ. जे गणेशन, डॉ. अमित अग्रवाल सहित 36 आइएएस ने अपनी संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करने की सहमति सरकार को दे दी थी। फिलहाल 2018 तक राज्य में आइएएस अधिकारियों की संख्या 145 है। आइपीएस अधिकारी 102 हैैं।

सुनील गुलाटी, वीएस कुंडू और चंद्रशेखर नहीं सूचना देने के हक में

हरियाणा सरकार में काम कर रहे आइएएस अधिकारी सुप्रभा दहिया, विजय दहिया, अशोक लवासा, डॉ. चंद्रशेखर, सुनील गुलाटी, वीएस कुंडू सहित 33 अफसरों ने अपनी संपत्ति का ब्योरा देने से मना किया था। उनके प्रतिवेदन भी सरकार के पास मौजूद हैैं।

डीएफएससी डीपी जांगड़ा के हाईकोर्ट में जाने के कारण रुकी थी सुनवाई

फरवरी 2012 में राज्य सूचना आयोग की पूर्ण पीठ ने इस केस की सुनवाई की थी, लेकिन सूचना आयोग ने जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक डीपी जांगड़ा की संपत्ति का ब्योरा मांगे जाने संबंधी याचिका हाईकोर्ट में लंबित होने का हवाला देकर तब सुनवाई अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई थी।

इसी बीच हाईकोर्ट ने राज्य सूचना आयोग के डीपी जांगड़ा से जुड़े केस में निर्णय को सही बताते हुए संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक करने के आदेश कर दिए, जिसके बाद आयोग की बेंच ने आइएएस व आइपीएस अधिकारियों की संपत्ति सार्वजनिक करने संबंधी केस की सुनवाई शुरू करने का निर्णय लिया है।

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