दीपक तिवारी
राहुल गांधी की 6 जून को मंदसौर में हुई विशाल जनसभा के ठीक 17 दिन बाद इंदौर में हुई प्रधानमंत्री मोदी की सभा को राहुल गांधी की सभा के मुकाबले अधिक सफल दिखाने की भाजपा की रणनीति फ़ेल हो गयी है।
जहाँ लाखों सरकारी व्यवधानों और रुकावटों के बाद भी राहुल गांधी की सभा में 2 लाख से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया, वहीं मोदी की इंदौर की सभा में तमाम सरकारी तामझाम एवं प्रयासों के बावजूद भीड़ के रूप में सुरक्षाकर्मी, स्कूल-कॉलेज के बच्चे, दिहाड़ी के मजदूर और प्रदेश भर से बसों में भर-भरकर लाये गए लोगों की संख्या बमुश्किल 30000 का आंकड़ा ही पार कर पाई है।
कुल 25000 की क्षमता वाले इंदौर के नेहरु स्टेडियम में प्रधानमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था में लगे जवानों के अतिरिक्त केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल, विशेष सशत्र बल, जिला बल, विशेष शाखा एवं होमगार्ड के जवानों, आयोजकों एवं प्रशासनिक अधिकरियों की संख्या ही लगभग 11000 रही, वहीं करीब 12000 स्कूली एवं कॉलेज के बच्चों को जबरन स्टेडियम में बिठाकर भीड़ दिखाने का ड्रामा किया गया।
हालांकि मध्यप्रदेश की भाजपा इकाई और मुख्यमंत्री शिवराज समेत सभी अधिकारयों को जनता के गुस्से और मोदी की सभाओं में लगातार कम होती भीड़ का पहले से अंदाजा था, इसीलिये जानबूझकर कम क्षमता वाले नेहरु स्टेडियम का चयन किया गया ताकि कार्यक्रम स्थल आसानी से भरा हुआ दिखाया जा सके। लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद इस कम क्षमता वाले स्टेडियम को भरने के लिए भी सरकार आम जनता नहीं जुटा सकी, मजबूरन बच्चों और कर्मचारियों को बिठाकर शिवराज ने अपनी लाज बचाने की असफल कोशिश की।
इस चुनावी साल में जहाँ कांग्रेस राहुल गांधी की सफल आमसभा को वोट में बदलने की योजना में जुट गई है, वहीं सत्ता विरोधी लहर के भंवर में उलझी भाजपा इस तरह के असफल आयोजनों से चिंता में दिखाई दे रही है। जबलपुर के अमित शाह के दौरे की विफलता के बाद मोदी की ये फ्लॉप जनसभा आने वाले चुनावों में भाजपा के लिए बड़ा संकट खड़ा कर सकती है।

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