वाराणसी। सर्व विधा की राजधानी व सांस्कृतिक नगरी   के सांसद नरेंद्र मोदी जब से देश के प्रधानमन्त्री बने तभी से इस नगरी को स्मार्ट बनाने की जोर-शोर से कवायद की जा रही थी। काशी जैसी पुरातन नगरी को स्मार्ट सिटी बनाने की दिशा में हो रहे विकास के कार्यों में लगी कार्यदायी संस्थाएं, प्रशासनिक अधिकारी आंकड़ों की बाजीगरी में इतने दक्ष हो गए कि जनता को मिलने वाली मूल-भूत सुविधाओं से कोषों दूर इस नगरी को स्मार्ट सिटी बनाने में देश के 11 शहरों में सुमार करा लिया और आंकड़ों की बाजीगरी से प्रदेश में प्रथम स्थान दिलाने में सफलता प्राप्त कर ली। परन्तु वे यह भूल गये कि किसी भी शहर/स्थान को स्मार्ट तभी बनाया जा सकता है जब सुनियोजित तरीके से कार्य संपादित कराया जाय। इस बात का ध्यान रखा जाय कि हो रहे विकास कार्यों से जनमानस को किसी प्रकार का नुक्सान न होने पाये। परन्तु पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में जिसको अनियोजित तरीके से कार्य हो रहे हैं उसको देखकर यह नहीं कहा जा सकता कि प्रदेश में अव्वल स्थान प्राप्त जिला स्मार्ट सिटी बन गया है जनता कराह रही है और अधिकारी आकंड़ों की बाजीगरी में दिन प्रति-दिन महारत प्राप्त करते जा रहे हैं। समस्याओं से कराहता शहर, जहां बुनियादी सुविधाएं नदारद हो जनता पीने के पानी को तरस रही, हो घर से लेकर मंदिर-मस्जिद तक गंदे पानी का सैलाब बह रहा हो, जिले में 24 घंटे बिजली आपूर्ति की घोषणा, चारों तरफ कूड़ों का अंबार लगा हो, वरुणा नाले में तब्दील हो चुकी हो, गंगा सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही हो फिर भी काशी को स्मार्ट सिटी का तमगा मिल गया। स्मार्ट सिटी काशी का असली चेहरा यहां के जनमानस से छिपा नहीं है। पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने का दावा जहां हवा-हवाई है वहीं यातायात व्यवस्था का आलम यह है कि एक किलोमीटर की दूरी तय करने में कम से कम एक से डेढ़ घंटे लगते हैं। विकास अभी भी कोसों दूर है 2019 लोकसभा चुनाव की तैयारी के चक्कर में निर्माणाधीन फ्लाइओवर का बीम गिरना इस बात का ज्वलंत उद्दाहरण है। प्रदूषण के मामले में काशी सूबे में तीसरे स्थान पर आता है, पर्यावरणविद् चिंतित हैं, उनकी आवाज नक्कार खाने में तूती बन कर रह गई है। विकास के नाम पर पूरा शहर खोद दिया गया है जिससे उड़ने वाली धूल फेफड़ों को छलनी कर रही है। अधिकारी जनप्रतिनिधियों की बातों को दरकिनार कर दे रहे हैं।
स्मार्ट सिटी का सर्वेक्षण वातानुकूलित कमरों से-भानू मिश्रा
कांग्रेस के पूर्व विधायक अजय राय ने केंद्र सरकार द्वारा काशी को स्मार्ट सिटी की रैंकिंग में पहला स्थान दिए जाने को काशी की जनता के साथ छलावा बताया। कहाकि यदि सूबे में काशी स्मार्ट सिटी के प्रथम पायदान पर है तो कबीर का जन्मोत्सव उनके जन्म स्थल काशी में क्यों नहीं मनाया गया। उनके निर्वाण दिवस पर मगहर में जयन्ती क्यों मनाई गई। स्मार्ट सिटी का निर्णय वातानुकूलित कमरों में बैठकर लिया गया है जनता से कोई सर्वेक्षण नहीं कराया गया। रैंकिंग करना है तो गलियों में घूम कर देखें और जनता से राय लें तो स्पष्ट हो जायेगा कि वास्तव में काशी किस पायदान पर खड़ी है। पीएम के संसदीय कार्यालय के आस-पास का ही हाल जब बुरा है तो अन्य स्थानों का क्या होगा। यदि दो घंटे जमकर बरसात हो जाये तो काशी तालाबों की नगरी नजर आने लगेगी।
पीएम के स्मार्ट सिटी का हाल बेहाल-आर०के०
स्मार्ट सिटी का दर्जा सौ प्रतिशत गलत है। पीएम की स्मार्ट सिटी कराह रही है, 24 घंटे बिजली देने का वादा हवा-हवाई हो चुका है। शासन-प्रशासन की अनदेखी के चलते पूरे शहर की स्थिति नारकीय हो गयी है, भूमिगत बिजली के तार जगह-जगह खुले पड़े हैं। सुबह से शाम तक पूरा शहर जाम से जकड़ा है। पीएम मोदी ने जनता के साथ छलावा किया है, जो सपने काशी की जनता को दिखाए थे चार सालों बाद भी पूरा नहीं हुआ। विकास के नाम पर काशी के स्वरुप को बिगाड़ा जा रहा है, मंदिरों के शहर में मंदिरों को तोड़ा जा रहा है जिसे पिछले दिनों काशी आये केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने भी स्वीकार किया।

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