धुले। महाराष्ट्र में जिस फर्जी वीडियो की वजह से पांच लोगों को भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला, जांच में पता चला है कि यह वीडियो भारत का है ही नहीं। सीरिया के मृत बच्चों के इस वीडियो पर पहले मराठी में और फिर हिंदी में वॉइस ओवर कर फर्जी खबर फैलाई गई थी।
वीडियो में जिन बच्चों को दिखाया जा रहा है, वह सीरिया में नर्व गैस अटैक में मारे गए थे। मगर, इस वीडियो में हिंदी भाषा में बताया जा रहा है कि इन बच्चों को गैंग ने मारा है ताकि उनके अंगों को निकालकर उनकी तस्करी कर सकें। साल 2013 में सीरिया में हुए एक हमले में ये बच्चे मारे गए थे। मगर, उनके वीडियो को बच्चा चोरों के गैंग के साथ जोड़कर फर्जी खबर फैलाई गई।
इस अपराध के लिए 23 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, लेकिन पुलिस अभी भी ऐसे फर्जी वीडियो को फैलाने के लिए जिम्मेदार लोगों के बारे में कोई सुराग नहीं लगा पाई है। पुलिस ने कहा कि वह वीडियो बनाने वाले लोगों का पता करने की कोशिश कर रही है। गुरुवार को केंद्र ने राज्यों से हिंसा की ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए कहा है।
बताते चलें कि फर्जी वीडियो की वजह से पूरे देश में अब तक 20 लोगों की हत्या की जा चुकी है। इसी तरह धुले, नासिक, नंदूरबार जैसे इलाको में फैली अफवाह की वजह से 10 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। हैरानी इस बात की भी इन इलाकों में मोबाइल भी ठीक से काम नहीं करता है।
इसके अलावा इसी तरह के एक और वीडियो की वजह से मालेगांव में दो लोगों की पिटाई कर दी गई। हालांकि, पुलिस का कहना था कि किडनैपिंग की कोई भी घटना नहीं हुई थी।
इस तरह के कई वीडियो सोशल मीडिया पर तैर रहे हैं जिनको झूठे ढंग से तोड़-मरोड़ कर हिंसा फैलाने में इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसा ही एक वीडियो पाकिस्तान में बच्चों के अपहरण पर जागरुकता फैलाने के लिए बनाया गया था। मगर, शरारती तत्वों ने इसका इस्तेमाल भी गलत तरीके से किया।

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