विकास वर्मा हरियाणा ब्यूरो गुरुग्राम

डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी से कहीं खुशी तो कहीं गम का माहौल है। दोनों के बीच की इस जंग पर उद्योग जगत से लेकर आर्थिक विशेषज्ञों तक की निगाहें टिकी हुई हैं। आइटी हब स्थित आइटीईएस कंपनियों को रुपये की कमजोरी भा रही है। निर्यातकों के लिए भी यह समय अच्छा माना जा रहा है। वहीं विदेश से आयात कर रहे व अमेरिका में अपने बच्चों को पढ़ाने वालों के लिए यह समय कठिन है। गुरुग्राम में ऐसे लोगों की कमी नहीं है जिनके बच्चे विदेश में पढ़ते हैं। इनमें से 80 फीसद पढ़ने के लिए उन्हें अमेरिका भेजते हैं। रुपये की कमजोरी से इनका खर्च भी लगातार बढ़ता जा रहा है।

गुरुग्राम ऑटोमोबाइल, गारमेंट, इंजीनिय¨रग, फूड प्रोसे¨सग और लेदर इंडस्ट्री का बढ़ा हब है। यहां विदेश से काफी कुछ आयात व निर्यात होता है। रुपये की मजबूती और कमजोरी का इस पर काफी प्रभाव पड़ता है। औद्योगिक विशेषज्ञ एसके आहूजा का कहना है कि विदेश से निर्यात करने वालों को रुपये की कमजोरी से फायदा मिल रहा है। वहीं आयातकों का जोखिम बढ़ गया है। साइबर सिटी से अमेरिका को सबसे अधिक आइटी निर्यात किया जाता है। रुपये के गिरते भाव के कारण इस सेक्टर को सबसे अधिक फायदा मिलने की संभावनाएं बन रही हैं।

गुरुग्राम के एमजी रोड स्थित एक अपार्टमेंट में रहने वाले अभिभावक राजेश ¨सह का कहना है कि उनका बेटा न्यूयार्क में पढ़ता है। रुपये के डॉलर के मुकाबले कमजोर होने से खर्च अधिक बढ़ गया है। क्योंकि यहां से भुगतान रुपये में करना होता है। जो वहां डॉलर में चेंज होते ही कम हो जाता है। अब पहले से अधिक रुपया भेजना पड़ रहा है। आर्थिक विशेषज्ञ जितेंद्र यादव का कहना है कि इस वर्ष अभी तक रुपये में 10 फीसद तक की टूटन आई है। डॉलर की मांग बढ़ने एवं क्रूड महंगा होने से रुपये पर दबाव बढ़ा है। डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी से अधिक घबराने वाली बात नहीं है। इस प्रकार का फेज कभी कभार आता रहता है। यह तात्कालिक है जल्द ही स्थिति सामान्य हो जाएगी। ऐसे में उद्योगों के लिए यह अधिक ¨चता का कारण नहीं है।

राज गुलिया, आर्थिक मामलों के जानकार आइटी आउटसोर्सिंग की बात की जाए तो रुपये की कमजोरी और डॉलर की मजबूती से बल मिलता है। आइटी कारोबार में लेन-देन डॉलर में होता है। यही कारण है कि निर्यात करने वालों को फायदा होता है।

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