दीपक तिवारी

हिन्दुओं के जननायक तथा अखंड हिन्दू राष्ट्र के लिए आजीवन संघर्ष करते रहने वाले अमर हुतात्मा वीर सावरकर जी को हर कोई जानता है. वही सावरकर जी जिन्होंने हिन्दुओं को उनकी ताकत का एहसास कराने के लिए, हिन्दुओं की सोयी हुई चेतना को जगाने के लिए एक बार कहा था कि अगर हिन्दू संगठित हो जाये, अगर हिन्दू एकता के सूत्र में बंध जाये तो देश का हर नेता जो हिन्दुओं के खिलाफ क्यों न रहा हो, वो भी कोट पर जनेऊ पहिनकर दिखाएगा कि वो हिन्दू है, माथे पर तिलक लगाकर सबको बतायेगा कि वो हिन्दू है तथा हिन्दुओं का सम्मान करता है.

वर्तमान राजनैतिक परिदृश्य को अगर देखा जाए तो वीर सावरकर जी की ये बात सच साबित हो रही है. 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान हिन्दुओं ने जो एकता दिखाई दी तथा मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीती मैं मदमस्त रहने वाले राजनैतिक दलों को उखाड़ फेंका, उसके बाद हमेशा हिन्दुत्व के खिलाफ बोलने वाले, हिन्दुओं का दमन करने वाले नेताओं के सुर बदल गये तथा अब इन नेताओं में खुद को हिन्दू समर्थक बताने के होड़ लगी है.ताजा मामला पश्चिम बंगाल है जहां की ममता सरकार ने मुहर्रम पर तलवार बैन कर दी है. ममता सरकार का ये फैसला काफी हैरान करने वाला है क्योंकि वर्तमान राजनीती में हिन्दू दमन तथा मुस्लिम तुष्टीकरण के लीडर की सूची बनाई जायेगी तो उसमें तृणमूल कांग्रेस प्रमुख तथा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाम सबसे ऊपर होगा. ऐसे में मुस्लिमों के त्यौहार मुहर्रम पर ताजिया के दौरान ममता सरकार का तलवार न चलाने का आदेश देना आश्चर्य पैदा करता है.

इसके अलावा ममता सरकार ने दुर्गा पूजा पंडालों को 10-10 हजार रुपये की मदद का ऐलान किया है. ये वही ममता बनर्जी हैं जिन्होंने पिछली बार दुर्गा पूजा पर रोक लगाई थी. ममता ने कहा है कि दुर्गा पूजा में छोटे पंडाल हों या बड़े पंडाल, सबको दस हजार रुपए मिलेंगे. इसके लिए ममता सरकार ने 28 करोड़ रुपये का बजट अलग से रखा है. इसके अलावा दुर्गा पूजा के दौरान ममता बनर्जी की सरकार पूजा कमिटियों से लाइसेंस फीस नहीं लेगी और पूजा पंडालों के लिए बिजली के रेट कम किए जाएंगे. इसके अलावा ममता सरकार ने कहा है कि मुहर्रम के जुलूस में हथियारों का प्रदर्शन नहीं किया जायेगा.

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