रेवाड़ी (आकाश सोनी): एक फरवरी को वित्तमंत्री अरुण जेटली इस सरकार का आखिरी पूर्ण बजट पेश करने जा रहे हैं। ऐसे में इस बजट को चुनावी बजट भी माना जा रहा है और हर वर्ग को इस बजट से बहुत उम्मीदें हैं। केंद्र सरकार कई संशोधनों के माध्यम से जीएसटी में राहत लेकर आई है, मगर कुछ विसंगतियां अब भी बरकरार हैं। केंद्र की मौजूदा नीति सब्सिडी को खत्म करने की है। जीएसटी के कारण औद्योगिक उत्पादन में कमोबेश गिरावट आई है, हालांकि पिछले कुछ माह में इसमें सुधार के संकेत भी मिले हैं। इन्हीं तमाम ¨बदुओं को ध्यान में रखते हुए सेवा क्षेत्र व कारोबारियों को इस बजट से क्या उम्मीद है विस्तृत बातचीत की गई।

 

बजट से बहुत सी उम्मीदें है जो सरकार को पूरी करनी चाहिए। सर्विस सेक्टर में पहले 15 प्रतिशत सर्विस टैक्स लगता था लेकिन अब इसे बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है जो कि पूरी तरह से गलत है। इससे सेवा क्षेत्र प्रभावित हो रहा है। सर्विस मुहैया कराने वालों को नुकसान है क्योंकि आउट सोर्स की बजाय अब इन हाउस ही कर्मचारियों को रखने लगे हैं। उम्मीद है कि इस बजट में जीएसटी की दर को घटाकर भी 15 प्रतिशत की जाए ताकि सेवा क्षेत्र प्रभावित न हो।

-मेजर टीसी राव, एमडी स्काइलार्क ग्रुप।

 

बजट में यही उम्मीद है कि व्यापार को पूरा पारदर्शी बनाने की दिशा में जो कदम उठाए गए हैं उनको जारी रखा जाए बस आवश्यकता है कि लोगों को टैक्स में छूट मिले। टैक्स स्लैब को बढ़ा दिया जाए ताकि सर्विस सेक्टर में काम करने वाले लोगों को राहत मिल सके। वहीं टैक्स अदा करने की दर को भी कम किया जाए।

-रमेश कुमार, टाइगर सिक्योरिटीज।

कारोबार को बढ़ावा देने के लिए बजट में विशेष प्रावधान किए जाए। औद्योगिक विकास को लेकर सरकार सरल नीतियां लेकर आए ताकि ज्यादा से ज्यादा औद्योगिक निवेश हो और सेवा क्षेत्र को इसका लाभ मिले। वहीं सेवा क्षेत्र में जीएसटी की दर 15 प्रतिशत ही की जाए तो लाभ मिलेगा।

-इंद्रजीत यादव, निदेशक एवी मैनेजमेंट।

 

जीएसटी व ई-वे बिल के आ जाने से व्यापार में पारदर्शिता बढ़ी है। शुरूआत में दिक्कते थी जिनमें सुधार भी हुआ है लेकिन जो थोड़ी बहुत खामियां रह गई है जिससे व्यापारी वर्ग प्रभावित है उनको भी इस बजट में दूर करना चाहिए। मैटल के पुराने माल पर 12 प्रतिशत एक्साइज लगती थी लेकिन अब 18 प्रतिशत जीएसटी कर दी गई है। जबकि नए माल पर 12 प्रतिशत जीएसटी है। पुराने माल पर भी 12 प्रतिशत जीएसटी ही की जाए ताकि व्यापारी सुगमता से व्यापार कर सके।

-प्रदीप कसेरा, महासचिव मैटल मर्चेंट एसोसिएशन।

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