विकास वर्मा (हरियाणा ब्यूरो) रोहतक:-

 कुपवाड़ा में शहीद हुए बसाना गांव के सैनिक मोनू का पार्थिव शरीर सोमवार दोपहर बाद गांव पहुंचा। जहां पूरे गांव की आंखों में आंसू थे वहीं बेटे की शहादत पर गर्व भी था। बीती शाम को ही शहीद मोनू का पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। शहीद मोनू को उनके बड़े भाई सोनू ने मुखाग्नि दी। इस मौके पर सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर, सांसद दीपेंद्र हुड्डा, कलानौर की विधायक शकुंतला खटक ने पहुंच कर शहीद मोनू को श्रद्धांजलि दी।
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26 तारीख को घायल हुए थे सैनिक मोनू
बसाना निवासी सैनिक मोनू जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा में 26 जनवरी की रात अपनी बैरक में थे। कुपवाड़ा में आर्मी कैंप पर आतंकियों के हमले में सैनिक मोनू को गोली लगी थी। सैनिक मोनू को तत्काल जम्मू के अस्पताल ले जाया गया लेकिन उसकी हालत में सुधार न होते देख उन्हें दिल्ली के आरआर अस्पताल में भर्ती करवाया गया। जहां शनिवार दोपहर जहर फैलने से उपचार के दौरान सैनिक मोनू का निधन हो गया। रविवार को पोस्टमार्टम न होने के चलते उन्हें सोमवार शाम को अंतिम विदाई दी गई।
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पत्नी को पति की शहादत पर गर्व
शहीद मोनू की शहादत से पूरे गांव की आंखें नम थी। वहीं उनकी पत्नी को अपने पति की शहादत पर नाज है। वहीं जब सांसद दीपेंद्र हुड्डा सैनिक के परिजनों से सांत्वना प्रकट करने के लिए उनके घर पहुंचे तो वहां पर महिलाओं ने रोना शुरू कर दिया। जिस पर सैनिक मोनू की पत्नी रेणु ने सभी को चुप होने के लिए कहा। उसने कहा कि पति की शहादत पर नाज है। उन्होंने कहा, “मैं सात जन्म भगवान से यही दुआ करती हूं कि मुझे ऐसा ही पति मिले।”

बसाना से की थी 12वीं पास
सैनिक मोनू ने 12वीं तक की शिक्षा आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बसाना से की थी। बचपन से ही मोनू सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना चाहता था। 2013 में वो सिग्नल कोर में भर्ती हुए थे।
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11 नवंबर 2017 को हुई थी सैनिक मोनू की शादी
सैनिक मोनू की 11 नवंबर को ही भिवानी जिले के बौंदकला की रेणु से शादी हुई थी। वो शादी के बाद 10 जनवरी के करीब ही ड्यूटी पर वापिस गए थे। ड्यूटी पर उसे सिर्फ 15 दिन ही हुए थे कि उनके साथ ये घटना हो गई। पति की शहादत का समाचार सुनकर रेणु बदहवासी की हालत में है। रेणु को सोमवार सुबह ही इस बारे में बताया गया था।

आखिरी बार की थी पिता से बात
सैनिक मोनू ने 25 जनवरी को अंतिम बार अपने पिता से बात की थी। उस समय सैनिक मोनू हंसकर बात कर रहा था। अगले ही दिन वे आतंकियों की गोली का शिकार हो गए। शहीद के पिता को अपने बेटे की शहादत पर गर्व है।

पूरा परिवार कर रहा देश की सेवा
शहीद मोनू के पिता सुरजन बंगाल इंजीनियरिंग से 2008 में सेना से रिटायर हुए थे। जबकि शहीद मोनू का बड़ा भाई सोनू भी 10 साल से सेना की सिग्नल कोर में रहकर देश की सेवा कर रहा है।
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सरकार अपना रही वोट बैंक की नीति: शहीद के पिता
शहीद के पिता सुरजन ने नम आंखों से सरकार को कोसा। अपने बेटे की मौत पर गम और शहादत पर गर्व करते हुए उन्होंने कहा कि आए दिन हमारे जवान सीमा पर शहीद हो रहे हैं लेकिन सरकार वोट बैंक की नीति अपना रही है। अगर केंद्र सरकार आर्मी को 4 घंटे का समय दें तो पाकिस्तान को पूरी तरह तबाह कर अपने जवानों की शहादत का बदला चुकाया जा सकता है। अगर सरकार मुझे मौका दे तो मैं आतंकवादियों को मारकर अपने देश के शहीद हुए जवानों का बदला ले सकता हूं।

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