नई दिल्ली (रामा नन्द तिवारी)
एसीपीआर दिल्ली यूनिट द्वारा आयोजित कार्यक्रम द लोकतांत्रिक समाज में नागरिक अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूकता फैलाना आज के समय की परम आवश्यकता है। आज पूरे देश में नफ़रत का माहौल परवान चढ़ रहा है। कानून के रखवाले ही संविधान की मूल भावना के विरूद्व कमजोर एवं वंचित वर्ग को फंसाने का काम कर रहे हैं, जिससे देश की अधिकतर जनता विशेष रूप से समाज के दबे कुचले, वंचित वर्ग एवं अल्पसंख्यक नाकरदा अपराधों की सजा भुगतने पर मजबूर है। ऐसी स्थिति में जन सामान्य में कानूनी जागरूकता पैदा करने  एवं पीड़ित व्यक्तियों को बिना किसी धर्म-जाति भेदभाव के कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए संगठन ए0पी0सी0आर अर्थात एसोसिएशन फाॅर प्रोटेक्शन आॅफ सिविल राईट्स देशव्यापी अभियान चला रहा है।  एपीसीआर के सचिव एडवोकेट एम अनवर नगीनवी ने बताया कि इसके तहत प्रशिक्षण कार्यशाला एवं विचार गोष्ठियों का देश एवं प्रदेश स्तर पर आयोजन किया जा रहा है। दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश के कई जिलों जिनमें बरेेली, मुरादाबाद एवं बिजनौर शामिल हैं, कानूनी जागरूता अभियान के अंतर्गत विचार गोठियों का आयोजन किया जा चुका है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए नई दिल्ली स्थित दावत नगर के सभाकक्ष में प्रशिक्षणशाला का आयोजन किया गया।
    कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे आई0पी0 यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अफ़ज़ल वानी ने कहा कि कानून पर इस प्रकार अमल हो कि समाज में अमन क़ायम हो सके तथा क़ानून ताक़तवर लोगों के लिए हथियार न बनने पाए, जैसा कि वर्तमान समय में देश में देखने को मिल रहा है। परन्तु दुर्भाग्यवश वर्तमान दौर में कानून केवल एक विशेष वर्ग के लिए ही सीमित होता जा रहा है, परन्तु इससे घबराने या मायूस होने की कतई ज़रूरत नहीं है। देश के संवधिान में सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान किये हैं, कानून सबके लिए है और सबके लिए समान है और इसके उदाहरण न्यायालयों में होने वाले निर्णय से प्रमाणित होते हैं। हमारे देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था बहुत मजबूत और सजग है। लोकतंत्र के सैनिक विश्व में भारत की इस पवित्र छवि को कभी भी धूमिल नहीं होने देगें, जिससे लोकतंत्र और कानून के विराधियों को निराशा ही हाथ लगेगी।
    कार्याशाला में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता रविन्द्र गरिया ने संवधिान के मौलिक अधिकार पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि किस तरह समाज में उनको लागू करके दमनकारी नीतियों एवं कार्यवाहियों से बचा जा सकता है। उन्होनंे बताया कि समाज में फैली हुई यह धारणा गलत है कि नागरिक अधिकारों के उल्लघन की सुनवाई/अपील केवल उच्च अदालतों में ही की जा सकती है, क्योंकि आज भी देश की 80 प्रतिशत आबादी उच्च न्यायालयों की पहंुच से बाहर है। साऊथ ऐशिया ह्यूमन राईट्स डाक्यूमेंट सेन्टर के अध्यक्ष रवि नागर ने बताया कि जो वर्ग या समुदाय अपने दस्तावेजों की सुरक्षा नहीं करता, वह स्वयं अपने ऊपर अत्याचार करता है। प्रभावी कानूनी सहायता प्राप्त करने के लिए उन्होंने दस्तावेजों के महत्व को कई उदाहरणों से प्रस्तुत किया। कार्यशाला में पत्रकार एवं आरटीआई कार्यकर्ता अफ़रोज़ आलम ने पावर प्वाईन्ट के द्वारा विस्तार से सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए आरटीआई के महत्व पर रोशनी डाली एवं चलचित्र के माध्यम से अपेक्षित जानकारी उपलब्ध कराई।
    इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के वकील शाहिद अनवर, तीस हजारी कोर्ट के सीनियर वकील जे0एच0 जाफ़री सहित अन्य अधिवक्तागणों ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम को सफल बनाने में सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट नवेद मियां का विशेष सहयोग रहा।

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