प्रशासन ने उजाड़ी किसानों की खड़ी फसले
नहर निर्माण का लक्ष्य याद आया मेंटेना को बिलखते रहे किसान और उनके परिजनलक्ष्य के आगे मानवता भूला प्रशासन
रीवा|(धीरु सिहं)
तराई अंचल के उम्मीदों की किरण त्योथर टमस बहाव परियोजना जिसके सहारे सत्ताधारी दल के बड़े बड़े नेता तक जनता को पंजाब और हरियाणा के कृषि उत्पादकता के सब्जबाग जनता को दिखा चुके हैं परंतु मेंटेना नामक नहरों की निर्माण कर्ता ठेकेदार कम्पनी के आगे नतमस्तक होकर किसानों के उत्पीड़न के मूक दर्शक बने दिख रहे हैं।
इसका प्रत्यक्ष प्रमाण सात आठ महीने से काम ठप्प रखने वाली मेंटेना कम्पनी के एकाएक नहर निर्माण का उतावलापन दे रहा है।जुलाई तक नहर में पानी डालने के नाम पर किसानों की खड़ी अधपकी फसलों को मशीनों से उजाड़ा जा रहा है।किसानों की पीड़ा  पर पुलिसिया डंडे के प्रहार के साथ मेंटेना कम्पनी के साथ प्रशासनिक तत्परता से खड़ा होकर किसानों के जीवन आधार फसलों को संवैधानिक ताकत के बल पर शान से उजड़वा रहा है।

पुरौना डांड़ी मोजरा तीन गाँवों की खड़ी गेहूँ अरहर की फसलों को त्योंथर एस डी एम के नेतृत्व में प्रशासन ने मेंटेना कम्पनी के जेसीबी एवं ट्रेक्टरों से उजड़वाया।पीड़ित किसानों की जवा तहसील कार्यालय के समक्ष मची गुहार की सच्चाई जानने के लिए एमपी ऑनलाइन न्यूज़ संवाददाता राहुल तिवारी ने जब तीनो गाँवों का दौरा किया तो प्रशासनिक सोच और किसानों की पीड़ा को देखा।लहलहाती अधपकी खड़ी फसलों को निर्दयता पूर्वक नष्ट किया जा रहा था।पीड़ित किसानों के बच्चे महिलाएँ बिलख बिलख कर रो रही थीं और प्रशासन उन्हें पकड़वा पकड़वा कर पुलिस की गाड़ियों में बैठा रहा था।बिना पूर्व नोटिस के प्रशासनिक बर्बरता अंग्रेजी शासन का बोध करा रहा था।

इस संबंध में जब हमारे संवाददाता ने प्रशासनिक टीम का नेतृत्व कर रहे एसडीएम त्योंथर से सवाल किया की क्या इन किसानों को एक महीने का समय नही दिया जा सकता था ? तो एसडीएम ने कहा जुलाई तक नहर का निर्माण पूरा होना है अगर पूरा नहीं हुआ और बरसात आ गई तो एक साल पीछे हो जायेगा।यह पूँछने पर की क्या किसानों को पूर्व में खेत खाली करने की नोटिस दी गई थी तो एसडीएम ने कहा हम पन्द्रह दिनों से लगे हैं।यह पूँछने पर की नहर के लिए अधिगृहीत भूमि को नापकर सीमा क्यों नही बनाई गई जिस कारण किसानों की अतिरिक्त फसल का भी नुकसान हो रहा है इस पर एसडीएम ने कहा नाप करवा रहे हैं फसलों की नुकसानी भी आरबीसी के तहत मेंटेना कम्पनी से दिलाएंगें।
*कुछ पल के लिए भगवान की तरह पीड़ितों को दिखे गिरीश* सुबह से शुरू हुए फसल उजाड़ो अभियान जब तीन बजे के लगभग डांड़ी में खड़ी फसलों पर तांडव कर रहा था उसी समय *कांग्रेस नेता गिरीश सिंह* निकल पड़े।पीड़ितों की गुहार सुन फसलों की दुर्दशा देख जेसीबी और ट्रेक्टरों को रोंका और उनके सामने धरने पर बैठ गये।अभियान रुका और चर्चा के लिए एसडीएम के नेतृत्व में प्रशासनिक अमला खेत पर पहुँचा।गिरीश सिंह से खड़ी फसलों को उजाड़ने के वजाय जहाँ अधूरी नहरें पड़ी है और फसले नही हैं उनको पूरा करने पर जोर दिया और खड़ी सफलों के लिए समय की माँग प्रशासन के सामने रखी।जिस पर एसडीएम कोई ठोस जवाब न दे सके और किसानों के फसलों की नुकसानी दिलाने की बात दुहराई।

गिरीश सिंह के पहल पर शेष बचे दिन के लिए फसल उजाड़ो अभियान थमा तो जरूर परंतु प्रशासनिक मानसिकता  और मेंटेना का उतावलापन निश्चित रूप से विकास के आड़ में सत्ताधारी दल के लिए चुनावी वर्ष में विनाशक सिद्ध होता दिख रहा है।यह विध्वंसक दृश्य कई सवाल छोंड़ रहा है जिनका जवाब  शासन प्रशासन और सत्ताधारी दल के लिए शायद ढूँढ पाना मुश्किल होगा।।

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