बहराइच (मोहम्मद फिरोज) मिशन 2019 की सरगर्मियां शुरू हो गई। राजनैतिक खेमों ने रण रक्षण के खाके को अमलीजामा पहनाना प्रारम्भ कर दिया है। यूपी की दो लोकसभा कब्जाने से उत्साहित सपा के सिपाही जनमानस को एमएलसी लीलावती कुशवाहा ने एक तिलक समारोह के बहाने जन मानस को चुनावी नब्ज टटोलने नानपारा पहुंची।
“सपा की फायर ब्राण्ड नेत्री और बहराइच वसुधा”
वाशिंदों की दुलारी लीलावती कुशवाहा एक तिलक कार्यक्रम में शरीक होने के लिए नानपारा पहुंची। यू तो तिलक समारोह उनके सजातीय संबंधों से सम्बन्धित था। लेकिन तिलक पाण्डाल के भीतर बाहर सपाइयों की सरगर्मी और जमावड़ा कुछ अलग अंदाज की चुगली कर रही थी। सपा नेत्री आगमन की सूचना पाकर हजारों लोग उनसे मिलने आये। दीर्घ अवधि के उपरान्त अपने बीच नेत्री को पाकर अपना-अपना शिकवा शिकायत दर्ज करा रहे थे। जनमानस के असीम प्यार से अभिभूत लीलावती मुस्कुराकर उनकी बातों पर गौर फरमा रही थी। चिरपरिचित अंदाज में आइन्दा शिकायत का मौका न देने की सफाई देती रही। सपा नेत्री ने बूथ वाइज सपा की तैयारियों की जानकारी लेती रही। अपने उपस्थिति के पूरे समय में सपा के प्रति जनता के भावनाओं की नब्ज टटोलती रही। योगी और अखिलेश के कार्यकाल के बीच मूलभूत विसगतियों को बड़े सधे सधाए संतुलित अंदाज में बया किया। मौके पर मौजूद जनमानस से 2019 में सपा के लिए समर्थन मांगने से भी नहीं चूकी। सपा नेत्री ने अपने राजनीतिक अनुभवों से कार्यकर्ताओं में उर्जापात किया। लीलावती कुशवाहा तो कुछ घण्टे बिताने के बाद चली गई। लेकिन जाते-जाते अपने पीछे छोड़ गई राजनीतिक गलियारों में गर्म चर्चाओं के कयास।
“पूर्वान्चल प्रवासियों एवं बिरादरी मतों पर प्रभावशाली पकड़”
बहराइच के नानपारा, मिहींपुरवा व महसी क्षेत्र में मौर्या बिरादरी का निर्णायक मत है। जिसको धु्रवीकरण और संग्रह करने की श्रीमती कुशवाहा में कूबत है। इसके अतिरिक्त पूर्वांचल के मतदाताओं में उनकी अच्छी पकड़ है। पूर्वान्चल प्रवासियों का क्षेत्र में संख्यानुपात ज्यादा है। जो चुनावी गणित के लिए बहुत मायने रखती है। सपा नेत्री का मायका और ससुराल दोनो पूर्वान्चल से ताल्लुक रखता है। पूरब की मृदभाषा उनके आदत में शुमार है। यही कारण है बिरादरी के साथ-साथ वे पूर्वान्चल प्रवासियों की चहेती नेत्री है। गरीबों के प्रति उनका सम्मान उनके राजनीतिक हैसियत कैफियत में चार चांद लगाते है। इसके अलावा मिहींपुरवा वन ग्रामों में इनकी बेहद मजबूत धाक है। बतौर राज्य मंत्री के दौरान वन ग्रामों का घर-घर दौरा किया। उनके समस्याओं को सुना, समझा। साथ ही वन विभाग अधिकारियों की ज्यादतियों के प्रति वन ग्रामवाशिन्दों को जन जागरित करने के अलावा पूर्व सीएम के संज्ञान में लाई। इन दबे कुचले उपेक्षित जनता के लिए कई सरकारी योजनाओं को लाकर  उत्थान का किरण बिखेरा।
“लीलावती का हुआ है ऐतिहासिक जन स्वागत”
सपा नेत्री उन दिनों सपा सरकार में राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त थी। लोकसभा चुनाव में कुछ दिनों के लिए पर्यवेक्षक बनी। मोतीपुर में जनसभा के लिए निकली तो पांच किलोमीटर तक हजारों मोटरसाइकिल। हजारो चार पहिया वाहनों के अलावा दसो हजार जनता इनके स्वागत में रोड शो किया। जनमानस की इतनी विपुल श्रंृखला सैलाब थी कि लखीमपुर, दिल्ली, बहराइच हाइवे घण्टो तक जाम रहा। इतने जनता का प्यार, स्नेह सपा नेत्री को मिला जो आज यहां तक किसी नेता को नहीं मिला। मंच. से सपा प्रत्याशी बीच में नीचे उतर कर साकेतिक बहिष्कार किया तो जनता ने इसे अपने नेत्री का अपमान समझकर सपा खेमे से बिदक गई। जो सपा प्रत्याशी के पराजय का कारण बनी। के डी सिंह
“दीदी सिम्बल है लीलावती की पहचान”
 
क्षेत्र में लीलावती कुशवाहा का सिममबल दीदी है। चाहे बच्चा हो, युवा हो, प्रौढ़ हो अथवा वृद्धजन या फिर महिलाएं सभी सपा नेत्री को दीदी के पद से पुकारते है। जन दीदी अंहकार से दूर इस अनोखे पवित्र रिश्ते को सदैव धार देती है। जनमानस का अवधारणा है कि दीदी सबकी और शिद्दत से सुनती है। यहां के इन कुछ विशेष क्षेत्र की लाखों जनता अपना प्रतिनिधि चुनने को बेताब रहती है। लेकिन एससी सीट आरक्षण का पेंच पड़ जाता है
“पूस की सर्द, किसानों के दर्द, वर्षा के मर्म संवेदना का धर्म मेरे रंग मेंः लीलावती “
टीचर के एक छड़ी की कड़ी से राजनीतिक शिखर आरोहण पर पीगे मारने वाली लीलावती कुशवाहा में अन्य नेताओं की तरह करनी कथनी में अन्तर नहीं है। धैर्य, धीरज, मृदभाषा उनकी अपनी धरोहर है। तिलक समारोह से फारिग होते ही कुछ मीडियाकर्मियों के लीलावती से सवाल किया कि आप सपा की दूत बनकर आती है। फिर अचानक गायब हो जाती है। सपा शीर्ष नेतृत्व आपका क्षेत्र बदल देता है। ऐसे में यहां की जनता आप पर यकीन करने का आधार क्या है। कि आप उनके मुसीबतों में मिलेगी भी? के सवाल पर सुश्री कुशवाहा कहती है कि राजनीति मुझे विरासत में नहीं मिली है। वे हवेलियों में नहीं अपितु गरीब परिवार के तंगहाली गलियों में जीवन के सोपान शुरू किए। उन्हें हर गरीब, किसान, मजदूर के बेवसी, करूणा और समस्या का मान है। क्योंकि इन्हीं समस्याओं में ये पली बढ़ी। जहां झूठ, मिथ्या, आडम्बर और वक्त के निर्लज्जता की जगह नहीं होती। माटी का मेरा दिल में महान सम्मान है। मै हर ऐसे लोगों को अपना फोन नम्बर देती हूं। कहती हूं मेरी जरूरत पड़े याद करना। किसी के परिचय के लिए डायरी नहीं लिखती हूं। इन्हीं जनमानस का आशीर्वाद है कि आज उच्च सदन में उनकी जुबान बनी। रही बात क्षेत्र से हटाने की तो सपा एक राष्ट्रीय पार्टी है हमें जहां भी जैसे जिम्मेदारी सौंपी जायेगी। मेरा फर्ज है उसको निभाऊ। बावजूद इसके इस क्षेत्र की जनता के प्यार दुलार का जो कर्ज है उसकी जन्म जन्मान्तर ऋणी रहूंगी। मै किसान की बेटी हूं। घर से लेकर खेतो तक में पसीने बहाई हूं। इसीलिए पूस की सर्द, वर्षा के मर्म, जिम्मेदारियों का धर्म और किसानों के दर्द मेरे रग-रग में है।

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