सुलतानपुर मे मुख्यमंत्री जी के आगमन पर विशेष

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आखिर क्या था कारण की मुख्यमंत्री जी को वास्तविकता से परे रखने मे खासी दिलचस्पी दिखायी जिला प्रशासन ने , क्या वास्तविकता से परे रखकर प्रशासन योगी जी को यह दर्शाना चाहते की भाजपा को जिताकर जनता ने जो भूल की है उसका मजाक उडाना मनतब्य है,फिलहाल योगी जी को वास्तविकता से अनभिग्य ऱख जिला प्रशासन ने अपनी पीठ थपथपवाकर भाजपा की भद्द करवाने मे कोई कसर नही बक्शी गयी।पढे किसी प्रकार भरमाया गया उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जी को?
रिपोर्ट-भानू मिश्रा एन टी वी टाइम स्टेट हेड उत्तर प्रदेश की कलम से
जनपद में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नही, बल्कि जिलें के महाभ्रष्ट अधिकारियों के रहनुमा का रहा दौरा
 बस यात्रियों को दो बूंद पानी भी न दिला सके पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ।
 जनपद सुलतानपुर में शायद प्रतापगढ़ नींद की खुमारी ने मुख्यमंत्री के दौरे को बनाया औपचारिक।
आखिर सुलतानपुर में योगी जी को ऐसा क्या दिखा, जिससें जनपद को मिला आल-इज-बेल का तगमा।
सुलतानपुर। यूं तो जनपद सुलतानपुर में भाजपा के एक वर्ष के कार्यकाल में देखने सुनने लायक कुछ भी नही हुआ, भाजपा के सभी विधायक नक्कारा के नक्कारा ही रह गये। जिलें में पहली बार मुख्यमंत्री के पूरे दौरे पर जिलें की जनता को मुख्यमंत्री ही नही बल्कि उनके विधायक भी जनता व मीडिया से मुंह चुराते ही दिखाई पड़े,
जो जनता को भाजपा के लिए वोट का पछतावा करने को मजबूर कर रहे थे, क्योंकि जिलें में सपा शासनकाल में शुरू हुआ विकास कार्य आजतक भाजपा शासन में अधूरे ही पड़े है,
उन्हें डर था कि कही उनकी विफलता का कारण जनता व मीडिया न पूंछ बैठें।
 जिलें के डीएम व एसपी तमाम अव्यवस्थाओं, कमियों को पेबन्द लगानें में सफल हुए और मुख्यमंत्री के जाते ही आल-इज-बेल की खुमारी में सो गये।
 बतातें चलें कि
जिलाधिकारी के मार्ग में पड़ने वाला नवनिर्मित रोडवेज टर्मिनल पर बस यात्रियों को दो बूंद पानी तक मयस्सर नही हो रहा है।
 मगर साहब की गाड़ी है कि बंगले और कलेक्ट्रेट के बीच रूकती ही नही, कूड़े के ढेर में खड़ी यात्री बस का इन्तजार करतें यात्री जगह-जगह लैट्रिंग व बाथरूम से पटे पड़े परिसर में बस का इन्तजार करते यात्री जनपद का नाम पूरे प्रदेश भर में रोशन कर रहे है। वही रोडवेज का एआरएम अरविन्द कुमार *भाजपा सरकार की विफलता पर ठहाके लगाते हुए परेशान यात्रियों को देखकर मानों कह रहा हो कि भाजपा को वोट दिया है, ऐसे ही भुगतों!*
 हद तो तब हो गयी
, जब पुलिस लाइन में मुख्यमंत्री का उड़न खटोला लैण्ड किया तो आरआई ने गन्दगी और अव्यवस्थाओं को छिपाने के लिए पूरे रास्तें को तम्बू और कनात से ढक दिया,
पर्दे के पीछें क्या है मुख्यमंत्री जी ने एकबार भी नही पूछां।
      कामोवेश यही हाल पूरें निरीक्षण का रहा, कि जिला प्रशासन ने मुख्यमंत्री जैसें सरकार के मुखिया की आंखों को पूर्णतया: सरकारी बना दिया, अधिकारियों ने जो जैसा चाहा, जिस तरह चाहा छक्का मारकर आल-इज-बेल का तगमा इस तरह लिया,
कि मानों जनता व प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री का न होकर इन महाभ्रष्ट अधिकारियों के रहनुमा का दौरा रहा हो। जनता जगह-जगह, चौराहे-चौराहे पूछं रही है कि आखिर मुख्यमंत्री जिलें में किस चीज की समीक्षा कर रहे थे।
 सीएम दौरे के दौरान हद तो तब हो गयी
 जब प्राईवेट स्कूलों के बच्चों की स्कूल चलों रैली बीएसए ने निकलवाई,
और मुख्यमंत्री जी को प्रतापगढ़ की इतनी जबरदस्त नींद की खुमारी रही कि उनके यूनीफार्म को देखकर एक बार भी नही पूछां कि हमनें तो गुलाबी ड्रेस बटवाई थी
 तो स्कूल चलों अभियान में ड्रेस नीली कैसें हो गयी? जरा सोचियें! अगर किराये के बच्चों से यही काम कराना था तो प्राथमिक विद्यालयों पर करोड़ो का खर्च क्यों?
वाह रे मुख्यमंत्री नींद की इतनी जबरदस्त जमुवाई बीएसए ने जबरदस्त छक्का मारा।
 यही नही पूरे अस्पताल परिसर में न पेयजल की सुविधा, न सफाई की, न दवाई का पता, न ही ओपीडी में डाक्टर,
आखिर मुख्यमंत्री को अस्पताल में क्या सही दिखा?
      यही हाल मंडी परिषद के गेहूं उपकेन्द्र का रहा, जहां चन्द लोगों के खातें में पेसें भेजकर अढ़तियों को फादा पहुचाने का खेल खेला जा रहा है, जहां 14 रूपये में गेहूं खरीदकर 17,85 पैसा सपकारी रेट का खरीद केन्द्र को बेंच रहे है।
मुख्यमंत्री जी तब भी सबकुछ आल-इज-बेल,  वाह रे भाजपा शासन तेरा जबाब नही!

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