अंधेरे की भयानकता खूब देखी है साहिब

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वन्दना शर्मा व्याख्याता हिंदी
अंधेरे की भयानकता खूब देखी है साहिब
मगर रोशनी भी कम भयावह नहीं होती
चमक और धवल की अधिकता पल में गिरा देती है
बरसों की कमाई सरलता को कलूटी कुटिला बना देती है
आंखें चुँधिया जाती हैं, हादसा ऐसा होता है
कभी ना उठ सकने जैसा अपाहिज बना जाती है
अंधेरे से भी घातक है ये रोशनी
मिटाकर जमीं पर औंधे मुंह गिरा जाती है
बचना इससे ये वो चौकी है ,जो खुद को अकाट्य बता जाती है।
( चौकी-टोना टोटका )

3 COMMENTS

  1. Bahut Khub Ji …AAP Gyan Ka Samundar ho Ji..

    आँखों से दुर करो उन हादसों को ….होसला रखो फिर खड़े हो जाओ…
    दुनिया को दिखा दो दम है आज भी होसलों सा…
    मैं पार कर लूँगा समुंदर को बस पतवार चाहिए…..

  2. आपके एक एक अक्षर मैं ……ज्ञान छुपा हुआ है…
    आपको वंदन ………………..
    वंदना……….

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