11 बैंकों के बंद होंगे एटीएम, जानिए कहीं आपका बैंक तो नहीं है शामिल

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ntv दीपक तिवारी
नई दिल्ली। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (PCA) लिस्ट के अंदर आने वाले स्टेट बैंकों ने अपने एटीएम बंद करने वाली है। कॉस्ट को कम करने के लिए आरबीआई के रेगुलेटरी ऑर्डर के बाद इंडियन ओवरसीज बैंक से लेकर कैनरा बैंक तक ने अपने एटीएम के शटर गिराने शुरू कर दिए हैं। आरबीआई के डाटा के अनुसार इन स्टेट बैंकों ने पिछले एक साल में 1,635 एटीएम बंद भी कर दिए है।
पीसीए लिस्ट में आने वाले स्टेट बैंकों ने पिछले एक साल में कई एटीएम बंद कर दिए
आरबीआई के पीसीए लिस्ट में आने वाले स्टेट बैंकों ने पिछले एक साल में कई एटीएम बंद कर दिए हैं। यह इसलिए हुआ है क्यों की पिछले एक साल में ग्रामीण भारत सहित देश में कैश विदड्रॉअल 22 प्रतिशत बढ़ा है। इस लिस्ट में इलाहाबाद बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, सेंट्रल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया और यूको बैंक को शामिल किया गया हैं। एटीएम में कटौती आरबीआई के रेगुलेटरी ऑर्डर्स के बाद की जा रही है। इंडियन ओवरसीज बैंक ने सबसे ज्यादा एटीएम को बंद किया है।
15 प्रतिशत एटीएम हुए बंद कर
बैंक ने अपने 15 प्रतिशत एटीएम को बंद कर दिया है। पिछले साल अप्रैल में बैंक के एटीएम की संख्या 3,500 थी, जो अब सिर्फ 3,000 रह गई है। इसके बाद कैनरा बैंक और यूको बैंक हैं, जिन्होंने अपने 76 प्रतिशत एटीएम बंद किए हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा और पंजाब नेशनल बैंक ऐसे दो बड़े बैंक हैं, जो पीसीए से बाहर होने के बावजूद एटीएम में कटौती कर रहे हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा ने 2,000 एटीएम बंद किए हैं, वहीं स्कैम में फंसे पीएनबी ने 1,000 एटीएम बंद किए।
प्राइवेट बैंकों ने लगाए गए एटीएम
जहां स्टेट बैंक एटीएम में कटौती कर रहे हैं, वहीं प्राइवेट और स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFBs) ने इसकी कमी पूरी कर दी है। नए फीनो पेमेंट बैंक ने 2,700 एटीएम मशीनें लगाई हैं, वहीं सबसे बड़े सार्वजनिक बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने 500 नए एटीएम लगाए। वहीं प्राइवेट बैंकों ने साल 2016 से 2017 के बीच 7,500 नए इंस्टॉल किए। हालांकि ये आंकड़ा उससे पिछले साल के मुकाबले कम है जब प्राइवेट बैंकों ने 15,714 एटीएम लगाए थे।
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इससे बिजनेस किसी भी तरह का कोई लाभ नहीं
एसबीआई के डिप्टी मैनेंजिंग डायरेक्टर नीरज व्यास ने कहा की एटीएम बिजनेस खास आकर्षक नहीं है। उनका कहना है की ‘एक एटीएम की कीमत 2.5 लाख होती है और ऑपरेशनल कॉस्ट 4-5 लाख के बीच। इसपर 20 लाख रुपये और जोड़ लें जिसपर कोई रिटर्न नहीं मिलता। अपने नेटवर्क पर नकदी और फ्री ट्रांस्जैक्शन का प्रबंधन करते हैं, और फिर हमारे ग्राहक अन्य बैंकों के एटीएम का उपयोग करते हैं। इससे बिजनेस किसी भी तरह का कोई लाभ नहीं होता है । मार्च 2016 से दिसंबर 2017 के बीच स्टेट बैंकों के शेयर में भारी गिरावट देखने को मिली थी। इस दौरान कॉमर्शियल लेंडिंग मार्केट में इन बैंकों के शेयर 32 लाख गिरे। वहीं इसी दौरान प्राइवेट बैंकों के शेयर 91 लाख करोड़ से बढ़कर 10 9 लाख करोड़ और एनबीएफसी में ये 22 लाख करोड़ से 39 लाख करोड़ पहुंच गए थे।

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