NRC विवाद पर बोले राजनाथ- किसी के साथ भी नहीं हुआ भेदभाव

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नई दिल्ली: असम में नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (एनआरसी) में 40 लाख लोगों को शामिल न किए जाने के मुद्दे पर गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सदन बयान देते हुए कहा कि यह है असम में फाइनल एनआरसी नहीं है। एसी की देखरख में एनआरसी का ड्राफ्ट तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि सबको फिर से अपील का हक है। किसी के साथ भी भेदभाव नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग गलतफहमी पैदा कर रहे हैं। माहौल को खराब करने की कोशिश की जा रही है। 

एनअारसी की रिपोर्ट है पूरी तरह निष्पक्ष 
इस मुद्दे पर हंगामे के बीच राजनाथ ने कहा कि रिपोर्ट पूरी निष्पक्ष है। जिनके नाम रजिस्टर में नहीं है उसके सामने अभी कई विकल्प आज भी मौजूद हैं। गृह मंत्री ने इस दौरान विपक्ष को इस मामले में सरकार का हाथ होने की बात साबित करने की बात दोहराई। सिंह इससे पहले यह बातें लोकसभा में भी कह चुके हैं और विपक्ष को चुनौती भी दे चुके हैं। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि एनआरसी की प्रक्रिया 1985 में असम समझौते के जरिये तत्‍कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के समय में शुरू हुई थी। इसको अपडेट करने का निर्णय 2005 में तत्‍कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लिया था।

40 लाख से अधिक लोगों नहीं मिली जगह
असम में रह रहे असली भारतीय नागरिकों की पहचान के लिए उच्चतम न्यायालय की निगरानी में चल रही व्यापक कवायद के तहत अंतिम मसौदा सूची में 40 लाख से अधिक लोगों को जगह नहीं मिली है। इस मुद्दे की गूंज संसद के दोनों सदनों में सुनाई पड़ी। राजनाथ सिंह विपक्ष से अपील कर चुके हैं कि वह इस संवेदनशील मामले का राजनीतिकरण नहीं करे क्योंकि सूची उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर प्रकाशित की गई है और केंद्र की इसमें कोई भूमिका नहीं है।

जानिए क्या है एनआरसी
देश में असम इकलौता राज्य है जहां सिटिजनशिप रजिस्टर की व्यवस्था लागू है। असम में सिटिजनशिप रजिस्टर देश में लागू नागरिकता कानून से अलग है। यहां असम समझौता 1985 से लागू है और इस समझौते के मुताबिक, 24 मार्च 1971 की आधी रात तक राज्‍य में प्रवेश करने वाले लोगों को भारतीय नागरिक माना जाएगा। नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (एनआरसी) के मुताबिक, जिस व्यक्ति का सिटिजनशिप रजिस्टर में नहीं होता है उसे अवैध नागरिक माना जाता है्। इसे 1951 की जनगणना के बाद तैयार किया गया था। इसमें यहां के हर गांव के हर घर में रहने वाले लोगों के नाम और संख्या दर्ज की गई है। एनआरसी की रिपोर्ट से ही पता चलता है कि कौन भारतीय नागरिक है और कौन नहीं है।

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