गरीबों की हुई बरसात,दोनों प्रमुख पार्टियां बेवजह के मुद्दों में उलझी,लेकिन विधाता ने गरीबों की सुनी

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राजीव श्रीवास्तव अलवर
असल में  केंद्र और सूबे की सरकार अपनी उपलब्धियां गिना रही है और विपक्ष सरकार की खामियों का पिटारा खोल रही है। जनता के असल मुद्दे या फिर कहे पीड़ा की ओर किसी पार्टी का ध्यान नहीं गया।सरकार ने जनता की बिना रॉय जाने ही बिजली का बिल दो माह की बजाए एक महीने में ही जबरन देना शुरू कर दिया।इससे गरीब लोगों का घरेलू बजट बिगड़ गया।अब उनके लिए बिल जमा करना बेहद मुश्किल हो गया है।असल में गरीब आदमी जब किसी निजी लोन कम्पनी से(सरकारी बैंक गरीबों को लोन के नाम पर गेट से ही भगा देती है।बैंक के दो चार ग्राहक ही मोदी,माल्या…..ही है)असल काम के लिए लोन लेता है तो वह लम्बी क़िस्त इसीलिए ही बनवाता है कि वह धीरे धीरे लोन चुका देगा और अपनी ईमानदारी कायम रखेगा।उसे लोन लेकर विदेश नहीं भागना।असल में उसे लोन भी उसकी जरूरत के हिसाब से ही मिलता है इसलिए वह हवाई जहाज से विदेश जाने की कल्पना भी नहीं कर सकता।
घरेलू गैस,पेट्रोल और डीजल के मामूली ही दाम बढ़ने से गरीब विचलित हो जाता है।ऐसे में बिजली का बिल हर माह आने से  गरीब आदमी के वेतन तीन हजार में से आधा हिस्सा बिजली का बिल खा जाता है और बचा कुछ हिस्सा बच्चों की पढ़ाई के साथ अन्य कामों में चला जाता है।गरीब आदमी सोच समझ कर चलता है उसे उम्मीद भी नहीं होती या फिर कहे उसकी ऐसी मानसिकता भी नहीं होती कि किसी मामले को दबाने के लिए महिला सब इंस्पेक्टर की तरह हराम में पचास लाख की रिश्वत भी मिल जाएगी। वह केवल इस जमी पर ऊपर वाले के रहम पर ही जिंदा रहता है और दो दिन से ऊपर वाला सुन भी रहा है।
दरअसल सरकार और विपक्ष अपने अपने एजेंडे पर चलते है।उन्हें वास्तविकता में जनता की असल समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है।आप जरा सोचिए और मंथन कीजिए जब मीटर रीडर रीडिंग लेने आता है तो घर का मुखिया बार बार रीडर से पूछता है कितने का बिल है यदि उसके अनुरूप नहीं आता है तो उस दिन परिवार में क्लेश शुरू हो जाता है।परिवार के सदस्य आपस मे एक दूसरे पर ज्यादा लाइट खर्च करने का आरोप लगाकर जुबानी जंग शुरू कर देते है और यह जंग जब तक जारी रहती है तब तक बिल जमा नहीं हो जाता है।फिर अगले महीने वहीं  . .. .
गरीब लोगों को चिकनी सड़क नहीं चाहिए उनके पास महंगी चौपहिया गाड़ी नहीं है जिससे टायर में कंकड़ लगने या  अन्य नुकसान होने के साथ कार में हिचकोले खाने की संभावना नहीं है।उसके पास एक एक पाई जोड़कर लाई गई साइकिल है जो पगडंडी पर भी सरपट दौड़ती है।हालांकि सड़क जर्जर होने से दुर्घटना होने की संभावना रहती है।गरीब लोगों की सरकार से बिजली का बिल फिर से  दो माह का देने की पुरजोर मांग की है।
सरकार अपनी उपलब्धियां गिना रही थीऔर विपक्ष सिर्फ और सिर्फ दलित और अल्पसंख्यको को मजबूत वोटबैंक बनाने के लिए रटारटाया एक ही बयान बार बार दे रही थी कि दलितों पर अत्याचार बढ़ रहे है।ऐसे में आखिर गरीबों की पीड़ा को विधाता ने ही गंभीरता से लिया और दो दिन से उमड़ घुमड़ कर वर्षा की।जिससे गरीब लोग कूलर का स्विच ऑन करना तो भूल ही गए है साथ ही पंखे की रफ्तार भी धीरे करनी पड़ गई।सभी जानते है गरीब आदमी को जीने के लिए हवा भी मामूली ही चाहिए जबकि पैसे वालों को ऑक्सीजन का बड़ा सिलेंडर चाहिए। वर्षा से खेत में लगी फसल को भी काफी लाभ हुआ है।अब गरीबों के साथ विधाता है सरकार एक माह की बजाए जबरन पन्द्रह दिन का बिल भी देना चाहे तो जनता उसका स्वागत करने के लिए तैयार है। विपक्ष भी चौबीस घण्टे दलित,अल्पसंख्यक का राग अलापने लगे तो गरीब को अब कोई परेशानी नहीं है।इसीलिए हमने वर्षा को भी अमीरी और गरीबी में बांट कर गरीबों की वर्षा का नाम दिया है।

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