राशन दुकानों पर लगे आधार से वितरण बंद करने को लेकर याचिका दायर।

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नई दिल्ली से रिपोर्ट रामा नन्द तिवारी…
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में आधार कार्ड के डाटाबेस की गोपनीयता भंग होने के चलते प्राइवेट क्षेत्र की सरकारी उचित दर की राशन दुकानों पर लगे आधार से वितरण बंद करने को लेकर याचिका दायर।
        एडवोकेट अगेंस्ट करप्शन सोसायटी के सचिव एडवोकेट प्रशांत सैनी ने बताया कि देश में सभी प्रदेशो की उचित दर की दुकानों पर जो Nfsa योजना का खाद्यान्न आधार कार्ड पर किया जाता है उसके डाटाबेस की गोपनीयता राशन विक्रेता के यहां से आपूर्ति विभाग के सहयोग से निजी क्षेत्र के लोगों को दे भंग की जा रही है, जो निजता के अधिकार का उल्लंघन है साथ ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना।
       गरीब जनता को बिना आधार के राशन नहीं दिया जाता यही कारण है कि उत्तर प्रदेश, दिल्ली व झारखंड सहित भूख से मरने वालों की मे इजाफा हुआ। जिसको सोसायटी द्वारा संज्ञान में लेते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई कि राशन दुकानों पर लिंक आधार कार्ड को निरस्त कर आधार पर वितरण बंद कराने के आदेश पारित किया जाय जिससे आधार कार्ड धारकों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा हो सके।
         गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले ट्राई के चेयरमैन राम सेवक शर्मा के आधार नम्बर हैक कर सारी गोपनीयता सार्वजनिक कर प्रधानमंत्री को चुनौती तक हैंकर एडलसन ने आधार का नम्बर देने पर सभी गोपनीय जानकारी सार्वजनिक करने को कह डाला जिस पर भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने स्वीकार किया और आधार का नम्बर न देने को कहा।
            मजे की बात यह है कि खाद्य विभाग जनता को बिना आधार कार्ड नम्बर लिए बिना खाद्यान्न नहीं देता और यह नम्बर सरकारी कार्यालयों में बैठे प्राइवेट कम्प्यूटर आपरेटर तथा विक्रेता लेता है जहां आधार की गोपनीयता भंग होने से कोई एजेंसी रोक नहीं सकती।
           अखिल भारतीय राशन विक्रेता सर्घष समिति के राष्ट्रीय सह संयोजक सरताज अहमद ने कहा कि विक्रेता तो विभाग के आदेश का पालन करते हैं यह सच है कि इस काम को कार्यालय में बैठे प्राइवेट सेक्टर के लोगों द्वारा किया जाता है। आधार कार्ड के नम्बर की गोपनीयता विक्रेता के यहां सुरक्षित रखने की कोई व्यवस्था नहीं है। आगे सरकार व कोर्ट का जो आदेश होगा उसका पालन उचित दर राशन विक्रेता करेगा सारी जिम्मेदारी सरकार की है।

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