होमगार्डों के उत्तरदायित्व और उनके बकाया भुगतान एवं मानदेय में वृद्धि पर विशेष

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लखनऊ से स्टेट हेड एन टी वी टाइम भानू मिश्रा उत्तर प्रदेश की होमगार्डो के दायित्व व उनके उत्तरदायित्व एवं बकाया भुगतान तथा मानदेय भुगतान पर विशेष सम्पादकीय होमगार्डो जवानों पर विशेष:-
होमगार्डों के उत्तरदायित्व और उनके बकाया भुगतान एवं मानदेय में वृद्धि पर विशेष-
 🇮🇳सुप्रभात-सम्पादकीय
साथियों,
               नमस्कार, सुप्रभात
      आज हम समाजिक सुरक्षा से जुड़े सबसे नीचे पायदान पर बैठे अपने उत्तरदायित्वों का पालन कर रहे होमगार्ड स्वंय सेवकों की दीनहीन दशा और मुख्यमंत्री के रहमोकरम पर चर्चा कर रहे हैं।उत्तर प्रदेश में पुलिस से मिलता जुलता खाकी वर्दीधारी होमगार्ड विभाग स्थापना के बाद से लगातार उत्तरोत्तर अपने विकास की ओर अग्रसर है और पुलिस के साथ कदमताल मिलाकर समाजिक सुरक्षा के दायित्वों का निर्वहन कर रहा हैं। पचास दशक पहले वाले होमगार्डो और आजकल के होमगार्डों में जमीन आसमान का अंतर है। पहले होमगार्ड बनने वाले अधिकांश जवान मामूली पढ़ें लिखे होते थे और उनसे डियुटी के नाम पर अधिकारी अपने घरेलू कार्य करवाते थे। न तो उनके पास बेहतर वर्दी थी और न ही उन्हें मेहनताना ही ढंग से दिया जाता था।होमगार्डो ने अपनी समर्पित सेवाओं के बल पर आज एक अपनी अलग पहचान बना ली है और चाहे पहरा हो, चाहे ट्रैफिक कंट्रोल हो, चाहे अधिकारियों की सुरक्षा हो चाहे दबिश या गिरफ्तारी हो हर क्षेत्र में होमगार्ड सराहनीय भूमिका निभा रहे हैं। इसके बावजूद होमगार्ड आजतक सरकारी सुरक्षा कर्मी नहीं बनकर नियमित वेतनभोगी नहीं बन सके.है और स्वयं सेवक की भूमिका आज भी निभा रहे हैं। पिछली सरकारों ने भले ही  पिछले दिनों खूब रेवड़ी बाँटी लेकिन इसे होमगार्डों का दुर्भाग्य ही कहा जायेगा कि सरकारों की इस राजनैतिक उदारता का भी कभी कोई लाभ इन होमगार्डों को नहीं मिल सका है। आज के जमाने में अगूंठाटेक मजदूरों की मजदूरी भी तीन से चार पाँच सौ रूपये तक हो गयी है जबकि राजगीरों की मजदूरी पाँच से हजार रूपये रोजाना मिलते हैं। होमगार्ड अगूंठाटेक बकरी चराने या मिट्टी गारा ईटा देने वाला मजदूर नहीं बल्कि पुलिस की तरह ही प्रशिक्षण प्राप्त रायफल लेकर चलने और रातदिन जानजोखिम में डालकर समाजिक सुरक्षा का उत्तरदायित्व निभाने वाला होता है। पिछली सरकार में पहली बार अखिलेश को इन होमगार्डों पर तरस आया था और उन्होंने इन्हें मिलने वाले रोजाना मानदेय में एकमुश्त सौ रूपये बढ़ाया था। इस समय तीन सौ पच्हत्तर रूपये रोजाना के हिसाब से इन्हें मानदेय मिल रहा था जिससे इनका इस महंगाई के जमाने में अला भला नही हो पा रहा था।समय के साथ साथ होमगार्डों के कलेवर में व्यापक बदलाव हुआ है और पढ़ें लिखे गार्डों की संख्या बढ़ने लगी है। आजकल समाजिक सुरक्षा से जुड़े हर कार्य में होमगार्ड पुलिस के दाहिने खड़े दिखते हैं और आवासीय विद्यालयों की सुरक्षा जैसे उत्तरदायित्व खुद बिना पुलिस के निभा रहे हैं।इतना ही डियुटी के दौरान अपने प्राणों की बाजी लगाने में होमगार्ड पीछे नहीं रहते हैं और आये दिन उनके परिवार अनाथ होते रहते हैं। डियुटी के दौरान मौत हो जाने पर दो चार लाख रूपये सहायता देकर उस जवान के परिवार को भगवान के सहारे छोड़ दिया जाता है। पुलिस इन होमगार्डों को अपना भाई नहीं बल्कि चाकर मानती है और जो चाहती वह करवाती है तथा न करने पर रोजनामचे में रपट लिख देती है। अखिलेश यादव के बाद  दूसरे ऐसे मुख्यमंत्री योगीजी हुये हैं जिन्होंने इनके मानदेय को सौ की जगह सवा सौ एकमुश्त बढ़ाकर पूरे पाँच सौ कर दिया है।इसकी घोषणा मुख्यमंत्री ने परसो लखनऊ के मंडलीय प्रशिक्षण केन्द्र के नवनिर्मित भवन के उद्घाटन अवसर आयोजित समारोह में उत्कृष्ट सेवाओं के लिये पदक देते हुयी की है। मुख्यमंत्री की इस घोषणा से होमगार्डों का मनोबल एवं उत्साह निश्चित तौर पर बढ़ा है। मुख्यमंत्री ने मानदेय ही नहीं बढ़ाया है बल्कि उनकी सेवाओं की सराहना करते हुये उनसे  बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद भी व्यक्त की है।इतना ही नहीं बल्कि मुख्यमंत्री द्वारा होमगार्डों के मानदेय में वृद्धि तथा पिछले अवशेष पड़े करोड़ों के भुगतान के आदेश से होमगार्ड विभाग में जैसे नयी जान पैदा हो गयी है। मुख्यमंत्री ने अच्छी वर्दी की बात की है लेकिन कमीशनखोरी के युग में जो कपड़ा इन्हें कभी कभार दिया भी जाता है उससे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद नहीं की जा सकती है।धन्यवाद

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