मुसाफिर खाना/अमेठी-कैसे बचेगी मोदी, योगी के सपनो की लाज?

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भानू मिश्रा

मुसाफिरखाना/अमेठी।
जहां एक तरफ केन्द्र सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत मिशन के तहत मोदी जी देश को खुलें में शौच मुक्त कराने के लिए अरबों-खरबों रूपया पानी की तरह बहा रहे है, वही दूसरी तरफ राज्य सरकार के अधीनस्थ कर्मचारियों व अधिकारियों का उनको मिलने वालें भारी-भरकम पगार से पेट न भरने की वजह से ग्राम प्रधानों के साथ मिलकर शौचालय में आये धन का बंदरबांट कर मोदी जी के सपनों के साथ खुलेआम बलात्कार करने में जुटे सूत्रों की माने तो बिकास खण्ड मुसाफिरखाना के ग्रामसभा मझंगवा में बन रहा शौचालय बंदरबाट के चलते पूरी तरह मानक के बिपरीत बनवाया जा रहा है। सूत्रों की अगर मानें तो यहां बन रहे शौचालयों में न सिर्फ पीलें ईट का प्रयोग किया जा रहा है, बल्कि प्लास्टर भी मोरंग की बजाय बालू से हो रहा है। सूत्र बतातें है कि यहां तैनात *सेकरेटरी सूरज पटेल व प्रधान अरमान द्वारा प्रति शौचालय 1000 रूपये लाभार्थियों से लिया जा रहा है।
 ऐसे ही कुछ हालात ग्रामसभा कनकूपुर का भी है। यहां भी निर्माण कार्य में खुलेआम पीलें ईट का प्रयोग तथा प्लास्टर पूरी तरह बालू से कराया जा रहा है। यहां के भी *सेकरेटरी देवेन्द्र पाण्डेय व प्रधान उर्मिला* की आपसी मिलीभगत के चलते प्रति शौचालय 1000 रूययें की वसूली की जा रही है। वही ग्राम सभा में एक घर में एक घर में चार प्रधानमंत्री आवास दिया जा रहा है और जो एक बार पा चुके हैं उनको तीन बार आवाज द्वारा दिया जा रहा है और जो पात्र हैं उनको आवास नहीं मिल रहा है ऐसे ग्राम सभा में बहुत से अपात्र लोग हैं जिनको प्रधानमंत्री आवास दिया गया जिनके घर पूर्ण तरह पक्का बना हुआ है उनको भी प्रधानमंत्री आवास कनकूपुर ग्राम सभा में दिया गया है
 इससे भी बुरे हालात ग्रामसभा कपूरचन्दपुर के है, स्थानीय सूत्रों का कहना है कि यहां के शौचालय निर्माण *ग्राम प्रधान अमरेन्द्र प्रताप व सेकरेटरी रामलखन के आपसी मिलीभगत से पूरी तरह ठेकेदारी प्रथा से कराकर एक तो बिना मानक के कार्य कराया जा रहा है, वही दूसरी तरफ लाभार्थियों से प्रति शौचालय 1000 रूपयें सुविधा-शुल्क के नाम पर वसूला जा रहा है।
 इसी तरह ग्रामसभा पलिया चन्दापुर भी किसी मायने में पीछें नही है। यहां मौजूद *सेकरेटरी राखी कश्यप व प्रधान रघुनाथ यादव के आपसी तालमेल में मानक के विपरीत शौचालयों का निर्माण कुछ इस तरह कराया जा रहा है कि शौचालय पूरी तरह मानक विहीन निर्माण कार्य हो रहा है। यही नही यहां के लाभार्थियों से 1000 से 1500 तक की वसूली हो रही है।
अगर हम ग्रामसभा गुन्नौर की अगर बात करें, तो यहां के *ग्राम प्रधान विमलेश व सेकरेटरी सौरभ श्रीवास्तव* द्वारा भ्रष्टाचार की सारी सीमाएं ही पार कर दी। यहां लाभार्थियों से न सिर्फ प्रति शौचालय 1000 की वसूली की गयी, बल्कि शौचालय का निर्माण ऐसे घटिया मानक के अनुसार कराया गया है जिसे लोगों को प्रयोग करने में भी सोचना पड़ रहा है।
 ये तो सिर्फ एक बानगी है, सूत्रों की अगर मानें तो इसकी शिकायत कुछ स्थानीय व ग्रामीणों द्वारा ब्लाक व जिलें स्तर पर अधिकारियों से भी की गयी, किन्तु नतीजा वही ढाक के तीन पात जैसा शून्य ही रहा, किसी अधिकारी के कानों में जूं तक नही रेंगी। विभागीय सूत्रों के अनुसार ग्रामसभा में शौचालय निर्माण से वसूलें गये धन में ग्राम प्रधान से लेकर सेकरेटरी, एडीओ पंचायत, खण्ड विकास अधिकारी से लेकर जिला मुख्यालय पर बैठे जिला पंचायतराज अधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी एवं जिलाधिकारी तक का हिस्सा बटा होता है। ऐसी परिस्थितियों में ये कहना गलत नही होगा, जिन हाथों में स्वच्छ रथ मिशन का बीणा दिया गया हो, जब वही चोर-चोर मौसेरें भाई मिलकर उसका बलात्कार करने की ठान ली हो तो कैसें पूरा हो सकता है मोदी और योगी का सपना साकार?

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