उद्यानिकी विभाग "देवसर" में भ्रष्टाचार चरम पर

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उद्यानिकी विभाग "देवसर" में भ्रष्टाचार चरम पर

रिपोर्टर:- जीतेन्द्र कुमार रजक 

सिंगरौली/देवसर:- किसानों को पता नही,और उनके नाम पर हजम करते लाखों की सब्सिडी*
*शासन प्रशासन की आँखों मे धूल झोंककर उड़ाए जाते हैं योजनाओं के परखच्चे*

जहाँ एक तरफ मध्यप्रदेश सरकार किसानों के नाम पर बड़े-बड़े ऐलान कर रही है, यहाँ तक कि पूर्व मुख्यमंत्री को वर्तमान सरकार घोषणावीर की संज्ञा भी दे चुकी थी. 
आरोप लगा रहे हैं कि पिछले कुछ सालों में उनकी एक दो नहीं 22000 घोषणाएं अधूरी हैं लेकिन जो पूरी हो रही हैं, उसमें भी भ्रष्टाचार का बोलबाला है. 
           *पूरा मामला मध्यप्रदेश में सिंगरौली के देवसर ब्लाक के उद्यानिकी विभाग का है* जहां अधिकारी कथित तौर पर निजी कंपनियों से सांठगांठ कर शासन से किसानों को मिलने वाली पता नही कितनी  सब्सिडी को हजम कर गए।कहीं राशि का भुगतान हो गया, किसान को पता नहीं लगा, तो कहीं एक नाम पर दो दो तीन-तीन बार भुगतान हो गया.
          
               किसानों को पता ही नहीं लेकिन सरकारी फाइलो में उद्यानिकी विभाग की ड्रिप इरीगेशन योजना में उनके नाम पर एक नहीं पता नही कितनी बार अनुदान मिल गया.
जाँच उपरांत कुछ मामले तो ऐसे सामने आएंगे की  किसान बेचारे आवेदन तक नही किये और  कागज़ पर उनके नाम पर पैसे निकाल लिए गए।   
     कुछ किसान तो ऐसे मिलेंगे की लगभग 2-3 किलोमीटर दूर नाले से पीने के लिए पानी लाते हैं और उनके नाम से ड्रिप स्प्रिंकलर आदि निकल चुका है,और उनको पता तक नही ये होता क्या है।
            देखा जाय तो पूरे देवसर क्षेत्रान्तर्गत पैक हाउस के नाम पर शासन के राशि का कितना दुरुपयोग किया गया है लब्जों में बयां नही किया जा सकता। कहीं बना ही नही,कहीं अधूरा बना पड़ा तो कहीं बनकर घरेलू उपयोग रहने सोने खाने के लिए हो रहा है,और समस्त सब्सिडी हज़म।
                    सारा मामला आईने की तरह साफ हो जाएगा जब इस विभाग की उच्च स्तरीय जाँच पिछले 10 वर्षों के समस्त योजनाओं के क्रियान्वयन और उनके हितग्राहियों की किजायेगी।
       यहाँ आलम ये  है कि सामान किसी और के नाम से स्वीकृत होता हैऔर ले कोई और जाता है। बेचारे गरीब आदिवासी किसान कर भी क्या सकते हैं।
          उद्यानकी विभाग के देवसर जनपद पंचायत के 90% पंचायतों का भौतिक सत्यापन करवाया जाय तो पता लग जाएगा कि कितने हितग्राहियों को सामान मिला है. 80% किसान ऐसे मिलेंगे जो यही बताएंगे कि  उन्हें कुछ नहीं मिला, कुछ तो ऐसे भी मिल सकते हैं जो उन गांवों में रहते ही नहीं.
                   अब नर्सरी की ओर चलें तो वहाँ का हाल तो निराला है वहाँ सब काम तो सिर्फ कागजों पर किया जाता है। पिछले वर्ष जो पौध वितरण हुआ था विशेष गाँवों में इसका जीता जागता उदाहरण है।सिर्फ रिकार्ड पर ही सारी योजनाओं का संचालन होता है।
    *सबसे बड़ी पोल तो तब खुल जाएगी कि इस विभाग द्वारा किसानों के वितरण के लिए जो भी सामान आता है उसका भंडारण कहाँ होता है, शायद कार्यालय से 5-10 किलोमीटर दूर विहड़ में और वहीं से गायब कर दिया जाता है।पिछले कई वर्षों से सारी योजनाओं की धज्जियां इस विभाग द्वारा उड़ाई जा रही हैं।अथवा उनके साथ खेल खेला जा रहा है*

*✍सर्व प्रथम प्रशासन से तो यही उम्मीद की जा सकती  है कि समस्त कृषि सामानों का भंडारण स्वयं की देख रेख में देवसर मुख्यालय के आसपास निश्चित किया जाय जिससे वास्तविक किसानों को आसानी से इसका लाभ मिल सके तदुपरान्त उद्यानिकी विभाग देवसर की विधिवत उच्चस्तरीय विभागीय जाँच कराई जाय।*
कुछ विभाग के कुछ कर्मचारी तो ऐसे हैं जो पुस्तैनी राज समझ रहें है उनको कोई कुछ बोलने वाला नही है, पिछले कई सालों से जमे हुए हुए हैं।
                 

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