नवरात्र के अवसर पर बगहा क्षेत्र में जगह-जगह विराजी मां दुर्गा की प्रतिमा।

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नवरात्र के अवसर पर बगहा क्षेत्र में जगह-जगह विराजी मां दुर्गा की प्रतिमा।

विजय कुमार शर्मा की कलम से बगहा प,च,बिहार


भक्ति और शक्ति का पर्व नवरात्रि 29 सितंबर रविवार को प्रारंभ हो गया है।मा अंबे का नौ दिवसीय नवरात्र पर्व 29 सितंबर से प्रारंभ हो चुका है। नौ दिनों तक देवी मंदिरों में भजन-कीर्तन, आराधना के कार्यक्रम लगातार होंगे। शहर में बनी मूर्तियां गांव-गांव तक पहुंच चुकी है। जिसके बाद सोमवार को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, मंगलवार को मां चंद्रघंटा पूजा, बुधवार को मां कुष्मांडा की पूजा, गुरुवार के दिन पंचमी को मां स्कंदमाता की पूजा, शुक्रवार के दिन षष्ठी मां कात्यायनी की पूजा, शनिवार के दिन सप्तमी को मां कालरात्रि की पूजा, रविवार के दिन अष्टमी को मां महागौरी दुर्गा महाअष्टमी पूजा, दुर्गा महानवमी पूजा संपन्ना होगी। सोमवार के दिन नवमी को मां सिद्घिदात्री नवरात्रि पारणा पूजा संपन्ना होगी। जिसके बाद मंगलवार को दशमी दुर्गा विसर्जन व विजयदशमी के रूप में मनाया जाएगा।विभिन्ना ग्रामों में शारदीय नवरात्रि पर्व के लेकर उत्साह नजर आ रहा हैं। पुलिस ने नवरात्रि एवं दशहरा का पर्व शांति पूर्ण मनाने की अपील की है
नवरात्रि के समापन के दिन किसी भी प्रकार से पर्व के संबंध में घटनाए परिलक्षित होने पर शांति व्यवस्था बनाये रखने पुलिस बल का इंतजाम किया जायेगा।शारदीय नवरात्रि आरम्भ होते ही क्षेत्र में चहुँओर सजा मां का दरबारसुबह शाम आरती दर्शन को लेकर लगा श्रद्धालुओ का हुजूम शारदीय नवरात्रि शुक्ल पक्ष की प्रतिपद से नवमी तक मनाई जाती है नवरात्रि के आरम्भ में घरो में महिलाओं द्वारा कलश रखकर विधि विधान से पूजा अर्चना आरम्भ कर नौ व्रत उपासना की गयी।अलसुबह से ही उपासक व अन्य श्रद्धालूओ द्वारा अपने गांव क्षेत्र मन्दिरो में जाकर माता रानी के दर्शन कर आरती वंदना की गयी।जिसमे  माता मंदिर बालमीकिनगर नर माँ देवी तो मदनपुर  वाली माता मंदिर 
बगहा के चंडीस्थान मंदिर अन्य स्थलों में भक्तों का जमावड़ा सुबह शाम लगा रहा साथ ही आरती वंदना से भक्तिरस का माहौल बना रहा।वही बताया गया कि वर्ष में मुख्य रूप से नवरात्रि के दो अवसर जिसमे चैत्र व शारदीय नवरात्रि के रूप में मनाया जाता है वर्तमान क्वार मास ने पड़ने वाली नवरात्रि पूजा को महानवरात्रि कहा जाता है जिसमे नवदिन पश्चात दशहरा पर्व भी मनाया जाता है हिन्दू शाश्त्रो को अनुसार मा दुर्गा ने नवमी के बाद दशमें दिन महिषासुर का संघार किया था और इसी दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था जिससे नवमी पश्चात दशहरा पर्व मनाया जाता है।

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