प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- उत्सव के चलते ही हमें कभी क्लब कल्चर में जाना नहीं पड़ा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- उत्सव के चलते ही हमें कभी क्लब कल्चर में जाना नहीं पड़ा

नई दिल्ली. दिल्ली में मंगलवार को द्वारका के दशहरा मैदान पहुंचने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली मेट्रो की एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन में सवारी की। उन्होंने कहा- जय श्री राम! आप सबको विजयादशमी के पर्व की अनेक शुभकामनाएं। भारत उत्सवों की भूमि है। शायद ही 365 दिन में एक दिन बचा होगा, जहां हिंदुस्तान के किसी ना किसी कोने में कोई ना कोई उत्सव न मनाया जाता हो।

मोदी ने कहा- भारत के सामाजिक जीवन का प्राण तत्व उत्सव है

  • हजारों साल की परंपराओं से हजारों वीर गाथाओं, सांस्कृतिक विरासत के चलते हमारे देश में उत्सवों ने संस्कार, शिक्षा और सामूहिक जीवन का प्रशिक्षण देने का काम किया। उत्सव नए सपनों को सजने का सामर्थ्य देते हैं। हमारी रगों में उत्सव धधकता रहता है। भारत के सामाजिक जीवन का प्राण तत्व उत्सव है। 
  • उत्सव के चलते ही हमें कभी क्लब कल्चर में जाना नहीं पड़ा। उत्सव के साथ एक प्रतिभा को निखारने का, उसे सामाजिक गरिमा देने का, पुरस्कृत करने का निरंतर प्रयास चला है। कला, वाद्य, गान, नृत्य हर प्रकार की कला हमारे उत्सवों से अभिन्न रूप से जुड़ी है। इसी कारण भारत के हजारों साल की सांस्कृतिक विरासत में कला के चलते भारत में रोबोट नहीं, जीते-जागते इंसान पैदा होते हैं।
  • इसके भीतर की संवेदनाएं, भावनाएं, दया भावना को लगातार ऊर्जा देने का काम उत्सवों के माध्यम से होता है। अभी-अभी हमने नवरात्रि के 9 दिन हिंदुस्तान का कोई कोना ऐसा नहीं होगा, जहां पर यह पर्व न मनाया जात हो। शक्ति साधना और उपासना का पर्व भीतर की कमियों को कम करने, असमर्थताओं से मुक्ति पाने के लिए होता है। ये शक्ति की आराधना नए स्वरूप में नई शक्ति का संचार करती है।
  • शक्ति साधना के साथ हर मां-बेटी की गरिमा की रक्षा का संकल्प हमारी जिम्मेदारी बनता है। हमारे यहां उत्सव युग-काल के हिसाब से बदलते हैं। हमारा समाज बदलाव को गर्व के साथ स्वीकार करता है। हम चुनौती देने वाले को चुनौती देते हैं और आवश्यकता के मुताबिक, ढलते भी हैं।
  • जब कोई कहता है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी, उसका कारण यही है कि समाज में बुराई आती है तो समाज के भीतर से ही बुराई के खिलाफ संघर्ष करने वाले महापुरुष पैदा होते हैं। हमारे ही समाज की बुराई के खिलाफ जब हमारे समाज का व्यक्ति निकलता है तो युगपुरुष और प्रेरणा पुरुष बन जाता है। बदलाव को स्वीकार करने वाले लोग हैं। दिवाली के पर्व पर हम महालक्ष्मी का पूजन करते हैं।
  • हमारे मन में सपना होता है कि आने वाला वर्ष लक्ष्मी हमारे घर में ही रहे। मैंने मन की बात में कहा था कि जिस देश में लक्ष्मी की पूजा होती हो, हमारे गांव-मोहल्ले में लक्ष्मी होती है, हमारी बेटियां लक्ष्मी का रूप होती हैं। हम इस दिवाली पर उन बेटियों को सम्मानित करें, जो दूसरों को प्रेरणा दे सकती हैं। यही हमारी लक्ष्मी पूजा होगी, वही हमारे देश की लक्ष्मी होती हैं।'

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