सामान्य वर्ग के पिता का पुत्र ,अनुसुचित जाती वर्ग की श्रेणी मे आरक्षीत कोटे का उठा रहा हे धड़ल्ले से लाभ

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सामान्य वर्ग के पिता का पुत्र ,अनुसुचित जाती वर्ग की श्रेणी मे आरक्षीत कोटे का उठा रहा हे धड़ल्ले से लाभ

बैतूल से नितिन अग्रवाल की रिपोर्ट
सामान्य वर्ग के पिता का पुत्र ,अनुसुचित जाती वर्ग की श्रेणी मे आरक्षीत कोटे का उठा रहा हे  धड़ल्ले से लाभ

बैतूल। आज एक येसा गोल माल कारनामा  उजागर हूआ है जिसको सुनकर बैतूल जिले के अनुसूचित जाति जनजाति के वर्गो के सामाजिक संगठनों के पैर के  निचे की मिट्टी खिसक जायेगी क्योंकि इस मामले में सिधे बैतूल जिले के आरक्षित श्रेणी के लोगों के अधिकारों पर सिधा  डाका डाला जा रहा है   चलिए आपको बताते है कि क्या हे ये पुरा गोलमाल घोटाला , बैतूल जिले में बगांल विभाजन के समय कुछ बंगाली  परिवारों को विस्थापितों के रूप मे चोपना पुर्नवास क्षेत्र में सामान्य केटेगिरी में पुनर्वास किया  गया था ,पर जन्म से अनुसूचित जाति में जन्में स्थानीय निवासियों का हक को मारा गया है।येसा ही एक पुनर्वास वाले परिवार के हितग्राही के पिता का नाम राशनकार्ड में  सामान्य केटेगिरी में दर्ज है जबकि पुत्र का नाम   राशनकार्ड में नहीं है और वह लाभ ले रहा है, जो कि दस्तावेजों में भी साफ-साफ नजर आ रहा है। मप्र में विस्थापना के समय बैतूल जिले में पश्चिम बंगाल से बैतूल जिले के चोपना पुर्नवास में बसाए गए लोगों को  मध्यप्रदेश सरकार ने सामान्य वर्ग में रखा गया है। जबकि यहां एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें ग्राम पंचायत झोली के राशनकार्ड पंजी में झोली- 1 सर्वे क्रमांक 161 पर तरूण मंडल का नाम दर्ज है वहीं परिवार के सदस्यों में उनके पत्नि और पुत्री का नाम दर्ज है। जिसमें लाभार्थी रोहित मंडल का नाम   इनके राशनकार्ड में दर्ज नहीं है। जबकि रोहित मंडल के नाम से शासन की योजनांर्गत अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र दूसरे राज्य पश्चिम बंगाल का लगाकर लाभ लिया जा रहा है। जिसमें स्थानीय अनुसूचित जाति के पात्र हितग्राही का हक मारकर अनुचित लाभ लिया जा रहा है। जबकि रोहित के पिता तरूण मंडल स्वयं विगत वर्ष 2005 में चोपना क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 8 से जिला पंंचायत सदस्य का चुनाव सामान्य वर्ग से लड़ चुके है। वहीं विगत वर्ष 2010 में रोहित मंडल की माँ सावित्री मंडल भी इसी वार्ड से सामान्य केटेगिरी में चुनाव लड़ चुकी है, फिर किस आधार पर अब रोहित तरूण मंडल अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र लगाकर स्थानीय अनुसूचित जाति के लोगों का हक मार रहा है। यदि यही हाल रहे तो चोपना में रहने वाले नमोशूद्र समाज के लोग बंगाल  से  जाति प्रमाण पत्र बनवाकर इसी तरह से स्थानीय लोगों का हक मारना प्रारंभ कर देेंगे। 


मामला इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन पेट्रोलियम पंप का
जिले के घोडाडोंगरी तहसील ग्राम चोपना में अनुसूचित जाति के लिये आरक्षित इंडियन ऑयल कारपोरेशन के पेट्रोल पंप का मामला है। रोहित पिता तरूण मंडल ने पश्चिम बंगाल का जाति प्रमाण लगाकर  पेट्रोल पंप की एनओसी प्राप्त की है और पेट्रोल पंप निर्माण को लेकर काम शुरू कर दिया है। जबकि जानकारों का मानना है कि बैतूल जिले में निवासरत विस्थापित बंगाली समाज के लोग इस तरह से पश्चित बंगाल का जाति प्रमाण पत्र लगाकर एससी कोटे का  लाभ नहीं ले सकते है।

जन्म स्थान कहीं और जाति प्रमाण पत्र कहीं का
रोहित पिता तरूण मंडल के इस मामले में यह बात बताई जा रही है कि रोहित का जन्म बैतूल जिले के चोपना क्षेत्र में हुआ है, और शासन की योजना का लाभ लेने के लिए उसके द्वारा अपना जाति प्रमाण पत्र पश्चिम बंगला के उत्तर 24 परगना जिले की बारासात तहसील के सबडिविजन कार्यालय से 10 अपै्रल 2014 को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र प्राप्त किया गया है। अब इस पूरे प्रकरण में कई सवाल खड़े होते नजर आ रहा है। अब देखना होगा कि स्थानीय लोगों का हक मारकर क्या इस तरह से किसी व्यक्ति को लाभ दिया जाना कहां तक उचित है। 
इनका कहना...
पश्चिम बंगाल में नमोशूद्र जाति के लोग अनुसूचित जाति की श्रेणी में आते  है।
तरूण मंडल रोहित के पिता
इस मामले में जांच कराई जाएगी, तभी कुछ उचित कहा जा सकता है अगर जांच में गड़बड़ी मिलती है तो कार्यवाही करेंंगे।
कुमार शानू, एसडीएम शाहपुर

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