अब प्रदेश में २४ घंटे शराब परोसने की तैयारी

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अब प्रदेश में २४ घंटे शराब परोसने की तैयारी

Ntv time deepak tiwari

भोपाल। (ntv time )। एक ओर सरकार प्रदेश में माफियाओं के खिलाफ बड़ी मुहिम चलाने की बात कह रही है तो तमाम अपराधों की जननी शराब को सुरा प्रेमियों के लिये २४ घंटे परोसने की सरकार तैयारी कर रही है इसकी शुरुआत शीघ्र ही इन्दौर से होगी, मजे की बात यह है कि सभी अपराधों की जनक शराब जिसको पीकर वाहन चालक जब सड़क पर चलता है तो दुर्घटनाओं को जन्म देता है चाहे वह तेलंगाना हो देश के अन्य राज्यों में जहां-जहां भी बलात्कार के और पीडि़ता को जलाने या उसकी हत्या के मामले सामने आये हैं उन सभी में अपराधियों के शराब पीकर ही इस तरह के कृत्यों का खुलासा हुआ है। लेकिन दूसरी ओर मध्यप्रदेश सरकार शराब के दुष्परिणामों से बेखबर अब अपना खाली खजाना भरने के लिये रोज नई-नई योजनाएं बनाने में लगी हुई है जबकि प्रदेश की कमाई वाला विभाग परिवहन विभाग की वह चौकियां भी हैं जहां से गुरजने वाले वाहन चालकों से चौकियों पर तैनात अधिकारी, कर्मचारी और उनके द्वारा पोषित निजी लठैतों के द्वारा जिस तरह से इन वाहन चालकों से अवैध वसूली की जाती है और इस की जाने वाली अवैध वसूली से राजस्व को नुकसान पहुंचाया जाता है, लेकिन कमाई वाले इस आबकारी विभाग की सरकार को इसलिये चिंता नहीं है कि परिवहन चौकियों की इस अवैध कमाई से सरकारी खजाना नहीं बल्कि राजनेताओं, अधिकारियों की तिजोरियां भरती हैं, एक अनुमान के अनुसार प्रदेश की ४० में से करीब २१ परिवहन चौकियों से प्रतिमाह ८० करोड़ से लेकर १०० करोड़ तक की काली कमाई के फेर में हर कोई लगा हुआ है, लेकिन सरकार को इन परिवहन चौकियों से होने वाली अवैध कमाई को रोकने की दिशा में कोई कारगार कदम न उठाकर सरकार के खजाने भरने की चिंता नहीं है बल्कि इस बार जिन परिवहन आयुक्त को इस विभाग की कमान सौंपी गई है, उनके इस विभाग में आने से तमाम लोगों को यह उम्मीद जागी थी तो वहीं विभाग में इस बात को लेकर खलबली मची हुई थी कि साहब लोकायुक्त से आये हैं जिसकी जिम्मेदारी भ्रष्टाचार को खत्म करने की है लेकिन नये परिवहन आयुक्त के चंद दिनों बाद ऐसा कुछ नजर नहीं आया बल्कि हाल ही में जारी परिवहन चौकियों पर जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की ट्रांसफर सूची जारी की गई है उसके बारे में कहा जा रहा है कि यह सूची कमाई वाली चौकियों पर गल्ला मण्डी जैसी बोली लगाकर पदस्थापना की गई है, अब सवाल यह उठता है कि जब परिवहन विभाग में इस तरह की प्रतिक्रिया लागू हो गई है तो इस कमाई वाले विभाग की राजस्व को और हानि होनी ही है, लेकिन लगता है कि इस विभाग की अवैध कमाई को नजरअंदाज करते हुए सरकार सबसे ज्यादा कमाई वाले विभाग आबकारी विभाग के जरिये नये-नये कमाई के रास्ते निकालने में लगी हुई है जिससे खाली खजाने को भरने की जुगत में है तो वहीं प्रदेश के नागरिकों को नशेलची बनाने की हरियाणा और पंजाब जैसे आदि प्रदेशों की श्रृंखला में लाने की तैयारी में लगी हुई है और इस योजना के चलते सरकार ने अब नया तरीका खोजा है उसके अनुसार प्रदेश के सुरा प्रेमियों के लिये अब २४ घंटे शराब परोसने की तैयारी की जा रही है और इसकी शुरुआत शीघ्र ही इन्दौर से की जायेगी, विभागीय सूत्रों के अनुसार इस स्कीम के तहत चुनिंदा होटलों में २४ घंटे शराब परोसने की अनुमति देने पर विचार किया जा रहा है, इस योजना को लेकर आबकारी विभाग के अधिकारियों का दावा है कि देश के कई बड़े शहरों में २४ घंटे शराब परोसने का लायसेंस दिया गया है और अब इन्हीं शहरों में इन्दौर भी शुमार होने जा रहा है जबकि प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इन्दौर की अब आईटी हब के रूप में भी पहचान बनती जा रही है, इस नीति को लागू कराकर लोगों को नशे की ओर ढकेलने वाले अधिकारियों का इस योजना को लेकर तर्क है कि इन्दौर में कई कॉल सेन्टर और आईटी से संबंधित ऑफिस रात भर खुले रहते हैं, जिनमें देर रात तक खाने-पीने की आवश्यकता भी होती है, इसी के मद्देनजर आबकारी विभाग इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है कि शहर के चुनिंदा होटलों को २४ घंटे सुरा प्रेमियों को शराब परोसने की अनुमति दी जाये, प्रदेश के लोगों को शराब का आदि बनाने के लिये तत्पर इन अधिकारियों का तर्क है कि इस योजना से सरकार को अतिरिक्त आय भी हो सके और लोगों को भी सुविधा मिल सके, सवाल यह है कि जिस शराब को तमाम अपराधों की जननी माना जाता है, उस शराब को २४ घंटे इन्दौर में परोसने की तैयारी करने वाले अधिकारियों का यह तर्क कि इस योजना से लोगों को भी सुविधा मिल सके, लोगों के गले नहीं उतर रहा है और २४ घंटे शराब परोसने की सरकारी योजना का तर्क देने वाले इन अधिकारियों के इस सुविधा का हर कोई मायने तलाशने में लगा हुआ है। मजे की बात यह है कि जिस इन्दौर में २४ घंटे शराब परोसने की तैयारी सरकार कर रही है उस इन्दौर में आज १७० से ज्यादा शराब की दुकानें हैं जिन्हें एफएल-१ लायसेंस दिया गया है, वहीं एफएल-२ श्रेणी के ६४ लायसेंस हैं जो रेस्टोरेंट और बार को दिये गये हैं जबकि ६७ लायसेंस एफएल-३ केटेगरी के हैं जो बड़ी होटलों को दिये गये हैं। इसके अलावा क्लब जैसी संस्थानों को एफएल-४ के अलावा एफएल-४ए केटगेरी के लायसेंस दिये गये जिनकी संख्या १७ है इसी आधार पर अब जिन होटलों के पास एफएल-३ श्रेणी के लायसेंस हैं उनमें पात्रता के आधार पर २४ घंटे शराब परोसने की अनुमति दिये जाने की योजना विभाग तैयारी करने में लगा हुआ है अभी इन्दौर से राज्य सरकार को शराब से ९०० करोड़ का राजस्व प्राप्त होता है जो इस योजना के लागू होने से एक हजार करोड़ तक हो जाने की उम्मीद विभाग के अधिकारियों का है, यानि एक वर्ष में एक करोड़ रुपया विभाग के इस २४ घंटे शराब परोसने की योजना से प्राप्त होगी और इस एक सौ करोड़ की अतिरिक्त आय से सरकार के खाली खजाने को राहत मिलेगी, लेकिन इस २४ घंटे शराब परोसने की आबकारी विभाग की योजना का विरोध भी शुरू हो गया है। विभाग के लोग जहां इन्दौर जैसे शहर में २४ घंटे शराब परोसने की योजना बनाने में तो लगे हुए हैं लेकिन इसी इन्दौर और उसके आसपास के शहरों से आयेदिन अवैध शराब की जब्ती के मामले भी हमेशा सुर्खियों में रहे हैं और इस तरह की अवैध शराब के कारोबार में इन्दौर संभाग में स्थापित शराब निर्माता कंपनियों के जब्ती के बाद नाम भी सामने आये हैं, लेकिन सरकार सख्ती से कार्यवाही नहीं करती जबकि इस तरह की अवैध शराब से सरकार को प्रतिवर्ष करोड़ों का नुकसान होता है, लेकिन विभाग के अधिकारी इन्दौर में २४ घंटे शराब परोसने से सरकार को एक करोड़ का आय बताकर २४ घंटे शराब परोसकर लोगों को शराब का आदि बनाने और शराब के सेवन से होने वाले अपराधों को जन्म देने की तेयारी में कर रहे हैं, जबकि यह सर्वविदित है कि इन्दौर से लेकर झाबुआ तक अवैध शराब का यह कारोबार आबकारी विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत के चलते इस तरह से पनप रहा है कि जिसका उदाहरण जागरुक अधिकारियों की सतर्कता के चलते आये दिन पकड़ी जाने वाली शराब के मामले इस बात की ओर संकेत करते हैं कि इस क्षेत्र में चल रही शराब फैक्ट्रियों से अवैध शराब का गोरखधंधा चलता है तो वहीं खबर तो यह भी है कि प्रदेश के जो १४ सरकारी भंडारण केन्द्र हैं वह केन्द्र भी अवैध शराब के कारोबार को पनपाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। जिस इन्दौर में २४ घंटे शराब परोसेने की तैयारी आबकारी विभाग कर रहा है और एक करोड़ की सरकार को आय होने का दावा कर रहा है, उसी इन्दौर से कहीं अधिक ज्यादा बियर और शराब झाबुआ जिले के छोटे से गांव पिटोल में बिक्री होने की खबरे हैं तो क्या अब सरकारी खाली खजाने को भरने के लिये इन्दौर के साथ धार-झाबुआ और अलीराजपुर में भी २४ घंटे शराब परोसकर सरकार खजाना भरने की योजना विभाग तैयार करेगा, हालांकि इन क्षेत्रों में आज भी भले ही लोगों को अपने बच्चों को पिलाने को दूध न मिले लेकिन सुरा प्रेमियों को शराब २४ घंटे उपलब्ध हो जाती है, आबकारी विभाग अपनी आय बढ़ाने के लिये योजना तो तैयार कर रही है क्या उन अधिकारियों को यह जानकारी नहीं है कि प्रदेश में जहां कमलनाथ सरकार के सत्ता पर काबिज होने के बाद शराब की बिक्री में २७ प्रतिशत वृद्धि हुई है तो वहीं सरकार के दस माह के कार्यकाल में ३०६२ महिलाओं के साथ अपराध की घटनायें भी बढ़ी हैं और दुष्कर्म की तो प्रदेश में यह स्थिति है कि दस में से चार नाबालिग बच्चियां दुष्कर्म की शिकार हो रही हैं, तो वहीं छेड़छाड़ जैसी घटनाओं में नाबालिगों का आंकड़ा भी कुछ कम नहीं है, अब जब २४ घंटे प्रदेश में शराब परोसने की योजना लागू होगी तो शराब जनित अपराधों में कितनी वृद्धि होगी यह तो भविष्य बताएगा?

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