ये वृद्ध नहीं, 27 साल की शारदा है, औद्योगिक प्रदूषण से हो गया ऐसा हाल

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ये वृद्ध नहीं, 27 साल की शारदा है, औद्योगिक प्रदूषण से हो गया ऐसा हाल

ये वृद्ध नहीं, 27 साल की शारदा है, औद्योगिक प्रदूषण से हो गया ऐसा हाल   ntv time deepak tiwari
नागदा. नागदा की आबोहवा में घुल रहे औद्योगिक रसायनों के जहर की भयावहता जाननी है तो 27 साल की शारदा को देख लेना ही काफी होगा, जो अब वृद्ध नजर आती हैं। मंगलवार को टीम के साथ यहां पहुंचे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक मुकेश बनोदे तथा भोपाल से आए वैज्ञानिक सुनील कुमार मीणा ने इन्हें देखा तो दंग रह गए।
टीम ने नदी, नालों के साथ टयू्बवेल, हैंडपंप और कुओं से पानी के सैंपल भरे। अधिकारी सबसे पहले चंबल डाउन स्ट्रीम के गांव परमारखेड़ी पहुंचे। यहां 837 लोगों की आबादी में 43 दिव्यांग हैं। ग्रामीणजन टीम को कालूसिंह के घर ले गए। 1995 के बाद कालूसिंह के बेटे मानसिंह (29) शारदा (27) और कन्हैया (25)  को शारीरिक और मानसिक दिव्यांगता ने इस कदर जकड़ा कि तीनों अपने पैरों पर खड़े तक नहीं हो सकते।
टीम ने यहां के बच्चों की हाइट और वजन कम होने पर भी आश्चर्य जताया। चंबल से सैंपल भरते समय यहां खाली जमीन पर सफेद पाउडर की सफेद परत देख टीम ने स्वीकार किया कि यह उद्योगों से चंबल में बहाए जा रहे रसायनों का असर है। क्षेत्रीय सांसद अनिल फिरोजिया ने शिकायत की है कि चंबल के डाउन स्ट्रीम के 22 गांवों में औद्योगिक प्रदूषण के कारण ग्रामीण बीमार हो रहे हैं तथा पशुओं की मौत के साथ जमीन बंजर हो रही है।
नागदा के अभिषेक चौरसिया ने भी शिकायत की है। टीम ने मेहतवास में एक हैंडपंप से भी पानी का सैंपल लिया। आधा घंटा हैंडपंप को चलाया गया तब भी इसमें से काला पानी ही निकलता रहा। अधिकारियों ने कहा कि 2021 तक उद्योगों से रासायनिक पानी निकलने पर रोक लग जाएगी।

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