एक अरब टीकाकार ने कहा है कि शहीद सुलैमानी दुश्मनों के लिए जनरल सुलैमानी से ज़्यादा ख़तरनाक हैं।

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एक अरब टीकाकार ने कहा है कि शहीद सुलैमानी दुश्मनों के लिए जनरल सुलैमानी से ज़्यादा ख़तरनाक हैं।

deepak tiwari

नजाह मुहम्मद अली अपने ट्वीटर हैंडल पर लिखा है कि सऊदी अरब ने शहीद जनरल क़ासिम सुलैमानी की छवि बिगाड़ने के लिए नई शैली अपनाई है। उन्होंने शहीद सुलैमानी की बेटी के नाम से एक फ़ेक पेज बनाया है ताकि शहीद सुलैमानी और ईरान दोनों की छवि बिगाड़ सकें। नजाह मुहम्मद अली ने लिखा है कि कुछ ग़द्दार ईरानी और सऊदी अरब की साइबर सेना बड़ी तेज़ी से इस फ़ेक पेज को वायरल करने की कोशिश कर रहे हैं।
 
इस अरब टीकाकार का कहना है कि सऊदी अरब के इस क़दम से पता चलता है कि शहीद सुलैमानी सऊदी शासकों के लिए जनरल सुलैमानी से ज़्यादा ख़तरनाक हैं। उन्होंने ईरान के दुश्मनों को संबोधित करते हुए लिखा है कि फिर तुम लोग जनरल क़ाआनी का क्या करोगे? उन्होंने अपनी निष्पक्षता सिद्ध करने के लिए लिखा है कि मैंने सद्दाम का विरोध किया जिसकी वजह से मुझे जेल में डाल दिया गया। मैंने अवैध क़ब्ज़े और राजनैतिक प्रक्रिया का विरोध किया, मैंने किसी भी चुनाव में भाग नहीं लिया, न मतदाता के रूप में और न ही प्रत्याशी के रूप में, मैंने किसी भी सरकार, संस्था या दल से एक पैसा भी नहीं लिया है। मैं इराक़ी हूं और यही मेरी पहचान है।
 
नजाह मुहम्मद अली ने यूक्रेन का यात्री विमान गिरने के बारे में लिखा है कि कुछ रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि यह विमान ईरान के मीज़ाइल से गिरा है, इस तरह की रिपोर्टें सिर्फ़ ईरान पर मानसिक दबाव डालने के लिए दी जा रही हैं क्योंकि इस्लामी गणतंत्र ईरान ने अपने बैलिस्टिक मीज़ाइलों से अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प की नाक मिट्टी में रगड़ दी है और उनकी हवा निकाल दी है। इस अरब पत्रकार ने کلنا سلیمانی "किलना सुलैमानी" (हम सब सुलैमानी हैं) हैश टैग के साथ एक दूसरे ट्वीट में लिखा है कि न्यूयाॅर्क टाइम्ज़ के प्रधान संपादक थाॅमस फ़्रेडमैन का मानना है कि जिन दसियों लाख शस्त्रागारों ने क़ासिम सुलैमानी की शवयात्रा में हिस्सा लिया, वे ईरान के मीज़ाइलों से भी ज़्यादा ख़तरनाक हैं।
 
वरिष्ठ अरब टीकाकार नजाह मुहम्मद अली ने अपने एक दूसरे ट्वीट में लिखा है कि फ़िलिस्तीन के जेहादे इस्लामी संगठन के शहीद कमांडर बहा अबुल अता की बेटी लियान ने जनरल क़ासिम सुलैमानी की बेटी ज़ैनब को एक पत्र भेजा है। बहा अबुल अता को इस्राईल ने ग़ज़्ज़ा में उनकी पत्नी के साथ शहीद कर दिया था।

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