उ0प्र0 सूबे के स्कूलों में संचालित डग्गामार वाहनों की आयी शामत

Total Views : 342
Zoom In Zoom Out Read Later Print

उ0प्र0 सूबे के स्कूलों में संचालित डग्गामार वाहनों की आयी शामत

मा0 उच्च न्यायालय ने जारी किया फरमान---स्कूल बसों की होगी फिटनेस जाँच

नेशनल ब्यूरोचीफ एनटीवी टाइम सुशील श्रीवास्तव की रिपोर्ट-----

इलाहाबाद हाई कोर्ट का सभी डीएम को निर्देश---

प्राइवेट स्कूलों में चल रहे डग्गामार वाहनों पर आयी शामत------

02 मार्च 2020 तक सभी स्कूल बसों का फिटनेस निरीक्षण कराएं

लखनऊ( उ0प्र0)
 
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खण्डपीठ ने उत्तर प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को 2 मार्च तक स्कूली बसों का फिटनेस टेस्ट करवाने का आदेश दिया है।

कोर्ट ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर जिलाधिकारी संबंधित यातायात अधिकारियों का प्रयोग कर सकते हैं।
कोर्ट ने प्रमुख सचिव परिवहन को आदेश का अनुपालन कराया जाना सुनिश्चित करने निर्देश भी दिया है। पीठ ने कहा कि सभी जिलाधिकारी 2 मार्च, 2020 तक रिपोर्ट प्रमुख सचिव परिवहन को देंगे और प्रमुख सचिव 21 मार्च तक रिपेार्ट कोर्ट में दाखिल करेंगे। अगली सुनवाई 27 मार्च को होगी।

यह आदेश चीफ जस्टिस गोविंद माथुर और जस्टिस चंद्रधारी सिंह की बेंच ने "वी द पीपल संस्था" की ओर से वर्ष 2017 में दाखिल याचिका पर पारित किया।
याचिका में स्कूली बस दुर्घटनाओं में बच्चों के हताहत होने के मामलों का जिक्र करते हुए स्कूली बसों के नियमित निरीक्षण की मांग की गई है।

कोर्ट ने याचिका में दी घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि कागजों पर तो सरकार ने काफी काम किया है, किंतु जमीन पर नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि ज्यादातर स्कूली बसों में दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है।
कोर्ट ने कहा कि प्रदेश की हर स्कूली बस का 20 नवंबर 2012 के दिशा-निर्देशों के अनुसार निरीक्षण किया जाए।
और
2 मार्च तक निरीक्षण अभियान पूरा करके अगले दस दिनों में सभी जिलाधिकारी अपनी रिपोर्ट प्रमुख सचिव, परिवहन विभाग को भेज दें, जिसे 21 मार्च तक कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।

स्कूलों के लिए सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन :-

- बसों के आगे और पीछे स्कूल बस लिखा जाए।
- लीज की बसों में आगे-पीछे विद्यालयीय सेवा (ऑन स्कूल ड्यूटी) लिखें।
- बसों में निर्धारित सीटों से ज्यादा बच्चे न बैठें।
- बस में फर्स्ट एड बॉक्स अनिवार्य रूप से हों।
- बसों की खिड़कियों में डबल आड़ी ग्रिल लगी हों।
- आग बुझाने वाले उपकरण मौजूद हों।
- बस के ड्राइवर को बड़े वाहन चलाने का कम से कम पांच साल का अनुभव हो।
- स्कूल बस में ड्राइवर के अलावा एक अन्य व्यस्क व्यक्ति (स्कूल का शिक्षक) होना चाहिए।
- बच्चों के बैग रखने के लिए सीट के नीचे जगह होनी चाहिए।
- बस में स्पीड गवर्नर लगा होना चाहिए। इसकी स्पीड 40 किमी हो।

मा0 उच्च न्यायालय के जारी इस फरमान से सूबे के तमाम स्कूलों में चल रहे डग्गामार स्कूली बसों को लेकर स्कूल प्रबन्धकों में खलबली मच गई है ।

See More

Latest Photos