देश के 1% अमीरों की संपत्ति निचले तबके के 95.3 करोड़ लोगों यानी 70% आबादी की कुल संपत्ति से भी चार गुना ज्यादा है

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देश के 1% अमीरों की संपत्ति निचले तबके के 95.3 करोड़ लोगों यानी 70% आबादी की कुल संपत्ति से भी चार गुना ज्यादा है

नई दिल्ली. देश के 1% अमीरों की संपत्ति निचले तबके के 95.3 करोड़ लोगों यानी 70% आबादी की कुल संपत्ति से भी चार गुना ज्यादा है। देश के 63 अरबपतियों की संपत्ति देश के एक साल के बजट से भी अधिक है। 2018-19 में देश का बजट 24 लाख 42 हजार 200 करोड़ रुपए था। दुनिया के 1% अमीरों के पास निचले तबके के 6.9 अरब लोगों यानी 92% आबादी की कुल संपत्ति से दोगुनी दौलत है। दुनिया से गरीबी खत्म करने के लिए काम करने वाली संस्था ऑक्सफेम की सोमवार को जारी रिपोर्ट 'टाइम टू केयर' में ये आंकड़े सामने आए हैं।

फोर्ब्स की 2019 की लिस्ट के मुताबिक दुनिया के टॉप-5 अमीरों की संपत्ति
नाम/देश     नेटवर्थ (लाख करोड़ रुपए)
जेफ बेजोस, यूएस     9.25
बिल गेट्स, यूएस     6.81
वॉरेन बफे, यूएस     5.82
बर्नार्ड अर्नोल्ट फैमिली, फ्रांस     5.36
कार्लोस स्लिम हेलु फैमिली, मैक्सिको     4.51

(दुनिया के अरबपतियों की लिस्ट मार्च 2019 में और भारत के अरबपतियों की लिस्ट अक्टूबर में आई थी। ऑक्सफेम ने संपत्ति के आंकड़े फोर्ब्स के मुताबिक ही माने हैं।)

इकोनॉमी में देश की महिलाओं का अनपेड योगदान एक साल के शिक्षा बजट का 20 गुना

रिपोर्ट में कहा गया है कि घर के काम करने वाली महिला को टेक कंपनी के टॉप सीईओ के एक साल के वेतन के बराबर कमाने में 22,277 साल लग जाएंगे। टेक कंपनी का सीईओ प्रति सैकंड 106 रुपए के हिसाब से 10 मिनट में उतना कमा लेगा, जितना घरेलू काम करने वाली महिला एक साल में कमाती है। महिलाएं और लड़कियां हर दिन 3.26 अरब घंटे बिना भुगतान के काम करती हैं। इनमें बच्चों और घर के सदस्यों की देखभाल से लेकर दूसरे घरेलू काम शामिल होते हैं। इतने काम की वैल्यू यह देश की इकोनॉमी में 19 लाख करोड़ रुपए के योगदान के बराबर है। यह राशि 2019 में देश के शिक्षा बजट (93 हजार करोड़ रुपए) से 20 गुना ज्यादा है।

मौजूदा व्यवस्था में महिलाओं, लड़कियों को सबसे कम फायदा

ऑक्सफेम इंडिया के सीईओ अमिताभ बेहर का कहना है 'मौजूदा आर्थिक व्यवस्था में महिलाओं और लड़कियों को सबसे कम फायदा मिलता है। वे खाना पकाने, साफ-सफाई, बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल में अरबों घंटे बिताती हैं। उनका ये बिना भुगतान वाला योगदान हमारी अर्थव्यवस्था, कारोबार और समाज की गाड़ी का छिपा हुआ इंजन है। असमानता खत्म करने की नीतियों के बिना अमीरों और गरीबों के बीच फासला नहीं मिट सकता। हालांकि, कुछ देश इसके लिए प्रतिबद्ध हैं।'

पिछले 10 साल में दुनिया में अरबपतियों की संख्या दोगुनी हुई
ऑक्सफेम की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के 2,153 अरबपतियों की संपत्ति 4.6 अरब लोगों यानी दुनिया की 60% आबादी की कुल संपत्ति से भी ज्यादा है। दुनिया के 22 अमीरों के पास अफ्रीका की सभी महिलाओं की कुल संपत्ति से भी ज्यादा दौलत है। दुनिया के सभी पुरुषों की कुल संपत्ति, सभी महिलाओं की कुल संपत्ति से 50% अधिक है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बहुत ज्यादा वैश्विक असमानता की स्थिति चौंकाने वाली है। पिछले 10 साल में अरबपतियों की संख्या दोगुनी हो चुकी, हालांकि पिछले साल उनकी कुल नेटवर्थ में कमी आई है।

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में वित्तीय असमानता पर चर्चा की उम्मीद
ऑक्सफेम ने 'टाइम टू केयर' रिपोर्ट 'वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम' (डब्ल्यूईएफ) शुरू होने से पहले जारी की है। पांच दिन का ग्लोबल समिट 'डब्ल्यूईएफ' मंगलवार से दावोस में शुरू होगा। इसमें दुनियाभर के 119 अरबपति शामिल जुटेंगे। साथ ही राजनीति और अन्य क्षेत्रों के दिग्गज भी हिस्सा लेंगे। समिट में 'सतत और मिलकर चलने वाली दुनिया' पर चर्चा होगी। इस दौरान आय और लैंगिक असमानता पर भी बातचीत होने की उम्मीद है। डब्ल्यूईएफ की ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट में भी यह चेतावनी दी जा चुकी है कि 2019 में वित्तीय असमानता जारी रहने और मैक्रोइकोनॉमिक जोखिमों की वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा।

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