विजय दशमी के पावन पर्व के शुभ अवसर पर ये प्रण लें कि हम अपने ह्रदय में झूठ से लड़ने कि सत्य की उर्जा शक्ति अर्जित करेगे।

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विजय दशमी के पावन पर्व के शुभ अवसर पर ये प्रण लें कि हम अपने ह्रदय में झूठ से लड़ने कि सत्य की उर्जा शक्ति अर्जित करेगे।

विजय कुमार शर्मा की कलम से  बगहा प,च,बिहार


 रावण तो इस श्रिष्टी से समाप्त हो चुका है मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने उसका वध कर दिया। मगर आज कलयुग में रावण रूपी विचार धारा लोगों के ह्रदय में प्रवेश कर चुकी है आज हमें अपने समाज में ऐसे लोग बहुसंख्या में मिल जाएगे राजनीति से लेकर हर विभागो या बड़े पूंजीपतियों में ये विचार धारा देखने को मिल जाएगी कमजोर वर्ग के लोगों को इस सामज मे शक्ति का डर एवं धन के लालसा देकर कैसे भी करके अपने सर्मथन में गलत कामो को कराने सफल हो जाते हैं इस युग कि राजनीति इतनी खराब है।आम जनता पर रावण रूपी आदेश व कानून या अध्यादेश पारित कर देते हैं और ये भी नहीं विचार करते इसका आम जनमानस पर क्या प्रभाव पड़ता है मगर हमारी भोली भाली जनता कुछ समय बाद भूल जाती है क्योंकि समय कि परत में वे मुद्दे छिप जाते है। और नये कानून और नई समस्याओं में उलझा दिया जाता है और उस ओर नहीं सोच पाते हैं  और हम रावण रुपी विचार धाराओं से बाहर नहीं निकल पाते  जिसका वे बड़ी सुन्दरता से अपना लाभ उठा लेते है और हम सबको समझते हूये भी अपने आपको उस छूट और जल कपट से नहीं लड़ पाते है और कभी हम जिनको अपना रक्षक समझते हैं वे भक्षक बन जाते हैं और हम अपनी प्रार्थना लेकर जाते हैं वे हम से नैतिकता नहीं अनैतिकता से बात करने लगते हैं और हमारी प्रार्थना को प्राथमिकता नहीं देते बल्की बलशाली लोगों के गलत व्यकत्व को प्राथमिकता दि जाती है और हम अपनी पीड़ा लिए अपने घर बैरंग वापस आ जाते हैं और हमारे समाज मे संविधान के नियमों को कोई महत्त्व नहीं दिया जाता है ऐसी रावण रूपी लोगो की विचारधारा हमारे समाज बहुसंख्या में मिलती है हम विचार करें विजयादशमी के दिन हम रावण को फूक आते हैं मगर सामज में रावण रूपी विचार धारा को ह्रदय से नही फूक पाते हैं आज से संकल्प लें कि अपने ह्रदय से रावण रुपी विचार धारा से मुक्त करेंगे नहीं तो ये रावण हमारे ह्रदय में हमेशा विराजमान रहेगा।

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