जबलपुर। कठौंदा में लगे कचरे के ढेर में नगर निगम प्रदेश का पहला स्वच्छता पार्क बनाने जा रहा है। इसकी शुरुआत वेस्ट टू एनर्जी और बायो वेस्ट का प्लांट लगाकर हो चुकी है। इसके अलावा नगर निगम यहां पर ई-वेस्ट, सीएण्डडी वेस्ट, कम्पोस्ट प्लांट, एमआरएफ प्लांट लगाने की तैयारी कर चुका है।

कचरे से बन रही बिजली

कठौंदा में नगर निगम एशिया का पहला वेस्ट टू एनर्जी प्लांट लगा चुका है। पिछले 3 साल से इसमें सूखे कचरा को जलाकर हर दिन 7 से 8 मेगावॉट बिजली बनाई जा रही है। इस प्लांट के लिए नगर निगम को हर दिन 450 टन कचरे की जरूरत होती है। प्लांट की अधिकतम क्षमता 11.7 मेगावाट है।

मलबे से बनेंगे ब्लाक

नगर निगम सी एण्ड डी (कंस्ट्रक्शन एण्ड डेमालिशन) प्लांट लगा रहा है। 4 एकड़ में लगने वाला यह प्लांट लगभग तैयार हो चुका है। इसमें शहर की इमारतों और अन्य जगहों से निकलने वाले मलबे का रिसायकिल किया जाएगा। इसके बाद उससे पेवर ब्लॉक, टाइल्स और रेत बनाई जाएगी। इस प्लांट से जो सामग्री निर्मित होगी उसका 50 फीसदी हिस्सा नगर निगम खरीदेगा।

22 एकड़ में बनेगा गार्डन

जबलपुर से 8 किमी दूर कठौंदा के 22 एकड़ में नगर निगम ने 11 साल पहले लैण्डफिल साइड बनाई थी। 2007 से यहां कचरा जमा हो रहा था, लेकिन वेस्ट टू एनर्जी प्लांट लगने के बाद यह कचरा धीरे-धीरे कर जल गया। अब नगर निगम इस क्षेत्र को हरियाली में बदलकर गार्डन बनाने की तैयारी में है।

गीले कचरे से बनेगी खाद, निगम के उद्यानों में डलेगा

शहर से निकलने वाला सूखा कचरा तो वेस्ट टू एनर्जी प्लांट में जल जाता है, लेकिन गीला कचरे के निष्पादन की कोई व्यवस्था नहीं थी। इसलिए निगम अब कठौंदा में 3 एकड़ में कम्पोस्ट प्लांट लगा रहा है। इसमें हर दिन 200 मीट्रिक टन गीले कचरे का निष्पादन किया जाएगा जो शहर का 60 फीसदी गीला कचरा होगा।

ई-वेस्ट मोबाइल से निकलेगा सोना-तांबा

नगर निगम ने शहर से ई-वेस्ट (टीवी, फ्रिज, कम्प्यूटर, मोबाइल, एसी, सीडी) कलेक्ट करना शुरू कर दिया है। इसे कठौंदा के एक एकड़ क्षेत्र में एकत्र किया जा रहा है। जल्द ही इसके निष्पादन के लिए एक प्लांट भी लगवाया जाएगा।