भोपाल। जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी ने कहा कि कुंभ में विभिन्न साधु संतों के सत्संग और धार्मिक एवं सामाजिक चर्चाओं के लिए महत्वपूर्ण है। जाति और उपजातियों में बंटा हुआ, हिंदू समाज कुंभ में एकजुट हो जाता है। यहां पर संस्कृति और धर्म का अनोखा संगम होता है।
उन्होंने कहा कि मैं 1940 से कुंभ में शामिल हो रहा हूं। पहले कुंभ में प्रवेश करने के साथ ही टीका लगवाना अनिवार्य था। कुंभ आने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सुविधाएं और इंतजाम भी बढ़ रहे हैं। किंतु अब कुंभ में सत्संग कम, प्रदर्शन ज्यादा हो रहा है। कुंभ का उपयोग अब राजनीतिक एवं व्यापारिक दृष्टि से भी राजनेता और व्यवसायी करने लगे हैं। इसके स्थान पर सत्संग पर ध्यान होना चाहिए।