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शिल्‍पा शिंदे का राजनीति के क्षेत्र में उतरने का फैसला सही साबित होग या नहीं, ये तो वक्‍त ही बताएगा। लेकिन अंगूरी भाभी को सोशल मीडिया पर उन्‍हीं के अंदाज में सलाह दी जा रही है।...
 
नई दिल्‍ली, जेएनएन। टीवी सीरियल 'भाबीजी घर पर हैं' से चर्चा में आईं शिल्‍पा शिंदे ने राजनीति में एंट्री कर ली है। राजनीति के मैदान में उतरने के लिए उन्‍होंने कांग्रेस पार्टी का हाथ थामा है। शिल्‍पा शिंदे का राजनीति के क्षेत्र में उतरने का फैसला सही साबित होग या नहीं, ये तो वक्‍त ही बताएगा। लेकिन 'भाबीजी घर पर हैं' में अंगूरी भाभी का किरदार निभाने वालीं शिल्‍पा को सोशल मीडिया पर उन्‍हीं के अंदाज में सलाह दी जा रही है। फैंस कमेंट कर रहे हैं- भाभी जी इस बार गलत पकड़े हैं...!
 
शिल्‍पा शिंदे सीरियल 'भाबीजी घर पर हैं' से चर्चा में आई थीं। लेकिन सीरियल के प्रोड्यूसर से विवाद के बाद उन्‍होंने ये सीरियल छोड़ दिया था। इस सीरियल में उनकी डायलॉग डिलीवरी का एक अलग अंदाज था, जिसे काफी पसंद किया गया था। वह हर बार अंग्रेजी का कोई गलत शब्‍द बोलती थीं, जिसे सामने वाला सही करता और फिर वह कहतीं- सही पकड़े हैं...!
 
 
 
कांग्रेस पार्टी का हाथ थामने को लेकर शिल्‍पा सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल हो रही हैं। लोग मजाकिया अंदाज में कमेंट कर रहे हैं। अंगूरी भाभी के एक फैन ने कमेंट किया- इस बार गलत पकड़े हैं! मैं शिल्‍पा शिंडे का प्रशंसक हूं, लेकिन कांग्रेस वाली शिल्‍पा का समर्थन नहीं कर पाऊंगा। वहीं एक फैन ने तो शिल्‍पा शिंडे को पागल तक करार दे दिया।
 
ट्विटर पर शिल्‍पा के अन्‍य फैन ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा, अगर आप ड्रामेबाज हैं, तो कांग्रेस पार्टी में आपका स्‍वागत है। एक अन्‍य यूजर ने लिखा- अंगूरी भाभी अब पप्‍पू को सपोर्ट करेंगी। इधर कांग्रेस के नेताओं ने शिल्‍पा का स्‍वागत किया। कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि शिल्‍पा शिंडे जैसी सशक्‍त महिला के जुड़ने से पार्टी को मजबूती मिलगी।
 
बता दें कि शिल्‍पा शिंडे 'भाबीजी घर पर हैं' छोड़ने के बाद रियलिटी शो 'बिग बॉस 11' कर भी हिस्‍सा रही थीं। शिल्‍पा बिग बॉस के इस सीजन की विनर रही थीं। लेकिन बाद उन्‍हें टीवी की फील्‍ड में कोई बड़ा ब्रेक नहीं मिला। शायद यही वजह है कि शिल्‍पा ने अब राजनीति के क्षेत्र में उतरने का निर्णय लिया।
 
ये महानायक सिनेमा से सियासत की तरफ़ गये, मगर ज़्यादा देर तक टिक ना सके...
राजेश खन्ना
राजेश खन्ना जैसा स्टारडम हिंदी सिनेमा के किसी सुपरस्टार ने नहीं देखा और भविष्य में इसकी संभावना भी कम है। मगर, राजनीति के मंच पर राजेश खन्ना फ्लॉप एक्टर साबित हुए। कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीतकर राजेश खन्ना 1992 से 1996 कर नई दिल्ली के सांसद रहे, मगर सियासत की पारी लंबी नहीं चली।
 
अमिताभ बच्चन
हिंदी सिनेमा के पर्दे पर नायक के नए तेवर पेश करने वाले अमिताभ बच्चन ने सियासत में क़िस्मत आज़मायी और इलाहाबाद से रिकॉर्ड मतों से लोकसभा चुनाव जीता भी, मगर तीन साल बाद ही अमिताभ बच्चन को अहसास हो गया कि राजनीति के वो कभी सुपरस्टार नहीं बन सकते। बच्चन ने इस्तीफ़ा देकर सियासत छोड़ दी।
 
धर्मेंद्र
धर्मेंद्र का फ़िल्मी सफ़र जितना शानदार रहा, उनका पॉलिटिकल करियर उतना ही आलोचनाओं का शिकार बना। धर्मेंद्र ने 2004 में बीकानेर से भाजपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीता, मगर संसद में ग़ैरहाज़िरी के लिए उन्हें क्रिटिसाइज़ किया जाता रहा। धर्मेंद्र ने इसके बाद राजनीति छोड़ दी।
 
गोविंदा
गोविंदा ने हिंदी सिनेमा में अपनी कॉमिक टाइमिंग से फ़ैंस का ख़ूब मनोरंजन किया है, मगर जब इस स्टारडम को राजनीति में करियर बनाने के लिए इस्तेमाल किया तो ट्रैजडी हो गयी। 2004 में गोविंदा ने कांग्रेस के टिकट पर मुंबई की विरार कांस्टिचुएंसी से लोकसभा चुनाव लड़ा, जीते भी, मगर उनका कार्यकाल काफ़ी विवादों भरा रहा। 2008 में गोविंदा ने अपने पॉलिटिकल करियर के क्लाइमेक्स का एलान कर दिया।
 
संजय दत्त
संजय दत्त के पिता सुनीत दत्त कामयाब राजनेता थे। उनकी बहन प्रिया दत्त भी राजनीति में सक्सेसफुल रही हैं। मगर, संजय पॉलिटिक्स में फ्लॉप रहे। उन्होंने 2009 के लोकसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी के टिकट पर नामांकन करवाया मगर अदालत ने उनके कंविक्शन को सस्पेंड करने के इंकार कर दिया, जिसके चलते चुनाव नहीं लड़ सके। उन्हें पार्टी का महासचिव बनाया गया, मगर 2010 में संजय ने पद और पार्टी छोड़ दी।