रायपुर। किसी भी शहर में धर्मशाला का मतलब समझा जाता है कि जहां कम कीमत पर साधारण सुविधाओं के साथ कमरे किराए पर मिलते हों। इसके विपरीत छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में ऐसी धर्मशाला है जहां स्टॉर होटलों से बेहतर सुविधा है। शानदार एयरकंडीशनयुक्त कमरे, विशाल हॉल, मखमली गार्डन जैसा लॉन और विशाल पार्किंग की सुविधा है। इसे 'निरंजनलाल धर्मशाला' कहा जाता है।

यह धर्मशाला सिर्फ शादी-ब्याह, सामाजिक सम्मेलनों जैसे बड़े आयोजनों के लिए ही उपलब्ध कराया जाता है। इस धर्मशाला की खासियत यह है कि यहां एक रुपए भी किराया नहीं लिया जाता। बेटियों का ब्याह रचाने अथवा सामाजिक सम्मेलनों के लिए धर्मशाला बुक करने को प्राथमिकता दी जाती है। पूरे साल धर्मशाला बुक रहने से लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ता है।थ्री स्टॉर होटलों की बगल में स्थित धर्मशाला

वीआइपी रोड स्थित 'निरंजन धर्मशाला' का निर्माण सन्‌ 2004 में किया गया है। इसका संचालन श्री रामस्वरूप निरंजनलाल चेरीटेबल ट्रस्ट द्वारा किया जा रहा है। वीआईपी रोड में जहां अनेक थ्री स्टॉर होटल बने हैं, उसी लाईन में श्रीराम मंदिर के ठीक सामने यह धर्मशाला स्थित है।
सर्वसुविधायुक्त एयरकंडीशन कमरे

धर्मशाला में 25 से अधिक एयरकंडीशन कमरे हैं। इसमें लग्जरी बेड, ड्रेसिंग टेबल, आलमारी और अटैच्ड बाथरूम है। 6 हजार वर्गफीट के दो एयरकंडीशन हॉल के अलावा 46 हजार वर्गफीट का विशाल मखमली घासयुक्त गार्डन (लॉन)है जिसमें रिसेप्शन, पार्टी का लुत्फ लिया जा सकता है। लगभग 300 कारों के पार्किंग की सुविधा है।
नौ माह पहले करानी पड़ती है बुकिंग

श्रीरामस्वरूप निरंजनलाल धर्मशाला ट्रस्ट के संचालक सुभाष अग्रवाल बताते हैं कि सर्वसुविधायुक्त धर्मशाला का किराया फ्री होने के चलते पूरे साल धर्मशाला बुक रहती है। इसके चलते नौ माह पहले आवेदन देना पड़ता है। उन लोगों को सबसे पहले धर्मशाला आवंटित की जाती है जिनके घर में बेटी का ब्याह हो।
युवक-युवती परिचय सम्मेलन, सामूहिक विवाह अथवा सामाजिक आयोजन हो। किसी भी जाति, धर्म से परे हटकर धर्मशाला का आवंटन किया जाता है। कोई भी व्यक्ति नियमानुसार बुकिंग करवा सकता है। भवन में मांस-मदिरा का सेवन करने पर पूर्ण रूप से पाबंदी है।

बिजली बिल, टूट-फूट की जिम्मेदारी बुकिंग करने वाले की
धर्मशाला के एयरकंडीशन कमरों, हॉल, लॉन में खपत होने वाली बिजली का बिल और किसी भी तरह के टूट-फूट, सफाई की जिम्मेदारी भवन बुक कराने वाले को उठानी होती है। इसके लिए अमानत राशि जमा करानी पड़ती है। बिजली बिल, टूट-फूट, सफाई का खर्च काटकर बाकी राशि वापस लौटा दी जाती है।