जबलपुर। जबलपुर में जल, जंगल, जमीन सबकुछ है। इसके साथ ही प्राकृतिक खूबसूरती भी है, यहां आने के बाद पर्यटक तारीफ किए बिना नहीं रहते। इतना सब कुछ शहर में होने के बाद भी पर्यटन फायदे का सौदा नहीं बन पा रहा क्योंकि टूरिज्म सेक्टर बेहद कमजोर है। इसकी वजह है मार्केटिंग की कमी और कागजों में चल रहा टूरिज्म डेवलपमेंट का प्लान है। जिसे कई बार बनाया गया, लेकिन वह कागजों के बाहर नहीं निकल सका। हकीकत में यदि प्लान बदलता तो टूरिज्म के जरिए ही शहर में बड़ा इनवेस्टमेंट हो सकता था।

भेड़ाघाट में रात के समय घूमने की सुविधा नहीं
-भेड़ाघाट में करीब 9 करोड़ रुपए का इनवेस्टमेंट प्लान बना।
-पंचवटी में कैफेटेरिया और लिफ्ट लगेगी पर निर्माण ध्ाीमी गति से हो रहा है।
-भेड़ाघाट में रात के वक्त घूमने के लिए कोई सुविधा नहीं है। पर्यटक दिन में चंद घंटे बिताकर लौट रहे।

-म्यूजिकल फाउंटेन और लेजर शो कुछ दिनों के बाद बंद हो गया। सवा करोड़ रुपए से अधिक बेकार हुए।
-धुआंधार में हाटबाजार और दूसरी कल्चर गतिविधियां बढ़ने से ही पर्यटक बढ़ सकते हैं।

रात में नौका बिहार की सुविधा शुरू करने की प्लानिंग लेकिन लाइटिंग नहीं।
बरगी में सुविधाओं का अभाव

-पर्यटकों के लिए बरगी बांध में मनोरंजन का खूब इंतजाम है, लेकिन सुविधाओं की कमी है। यहां खाने-पीने और ठहरने के लिए सिर्फ पर्यटन विभाग का होटल है। पर्यटक अधिक होने पर ठहरने की समस्या होती है।
-बरगी से मंडला के बीच क्रूज चलाने की योजना मप्र पर्यटन ने सालभर पहले बनाई लेकिन कुछ नहीं हुआ

वाटर स्पोर्ट्स का परफेक्ट डेस्टिनेशन

शहर में वाटर स्पोर्ट्स का परफेक्ट डेस्टिनेशन है। 2015 में सेना के सर्वे को पूर्व कैबिनेट मंत्री अजय विश्नोई ने फीडर नोड बनाने का प्लान तत्कालीन सीएम को दिया। मप्र में वाटर स्पोर्ट्स का नोड भोपाल है। जबलपुर को फीडर नोड बनाने की डिमांड हुई थी। बात हुई, पर अमल नहीं हुआ।

-आर्मी के ग्रेनेडियर्स रेजीमेंट सेंटर के जवान गौर नदी पर वाटर स्पोर्ट्स की ट्रेनिंग ले रहे हैं। इस सुविधा से शहर और प्रदेश के युवा वाटर स्पोर्ट्स का लाभ ले सकते थे।

-आर्मी ने बरगी डैम, गौर नदी, ललपुर, खंदारी जलाशय को वाटर स्पोर्ट्स के लिए सही माना था।

बैलेंस रॉक की अब ले रहे सुध

बैलेंस रॉक अभी तक पत्थरों और कब्जों के बीच था। स्मार्ट सिटी बनने पर इसकी सुध ली गई। कब्जे हटाए गए और सौदर्यीकरण शुरू हुआ। बिजली और अन्य सुविधा दे रहे हैं। मार्केटिंग नहीं हो पाई। इस वजह से पर्यटक कम आ रहे हैं।

पायली जाने का रास्ता तक बंद

24 दिसंबर 2017 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पायली के गेस्ट हाउस में ठहरे। उन्होंने पायली का हनुवंतिया की तर्ज पर विकास करने का वादा किया था। हुआ कुछ नहीं। पहुंच मार्ग तक बंद हो गया। वन विभाग ने जंगल से नया रास्ता निकाला। पायली में ठहरने, खाने और सुरक्षा जैसी बेसिक सुविधा अभी तक मुहैया नहीं हुई। असामजिक तत्व इस क्षेत्र में सक्रिय रहते हैं। अवैध तरीके की गतिविधियां संचालित होती हैं।

तालाबों का शहर फिर भी अनदेखी

-यहां के तलाब आकर्षण का केन्द्र बन सकते हैं। तालाबों के निर्माण की इंजीनियरिंग की मार्केटिंग जरूरी है।

-संग्राम सागर तालाब जो पहाड़ों के बीचोंबीच बना है। ऊंचाई के बावजूद पानी हमेशा बना रहता है। सौन्दर्यीकरण का काम , लेकिन रखरखाव नहीं। टूरिस्ट कम ही आते हैं।

-रानीताल, हनुमानताल, सूपाताल, माढ़ोताल तालाब गोकलपुर को भी संवारा जा सकता है, लेकिन पहली चुनौती इस क्षेत्र की गंदगी को तालाब में आने से रोकना है।

डुमना में नहीं बन पाई सफारी

डुमना नेचर पार्क के सौन्दर्यीकरण में करोड़ों रुपए खर्च हुए। सफारी बन सकती है, सिर्फ यह पता करने नगर निगम ने 2013-14 में 20 लाख खर्च किए। डीपीआर ही गायब हो गई।

-2015 में टाइगर सफारी की योजना बनी। साल 2018 में वन विभाग ने डुमना को आबादी और एयरपोर्ट के नजरिए से उपयुक्त नहीं माना।

-यहां टूरिस्ट के लिए बहुत सुविधाएं नहीं है।