Tuesday, August 9, 2022
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कैट ने लगाया मेट्रो एजी पर एफडीआई कानूनों के उल्‍लंघन का आरोप, सरकार से कार्रवाई की मांग


नई दिल्‍ली. कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स Confederation of All India Traders (कैट ) ने देश में मेट्रो कैश एंड कैरी पर एफडीआई नीति (FDI policy) और नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है. कैट का कहना है कि इस वजह से शहरों में 70 फीसदी से ज्‍यादा व्‍यापार कम हो गया है, छोटे व्‍यापारी (small traders) बर्बादी की कगार पर हैं, लेकिन अब व्‍यापारी चुप नहीं बैठेगा, इनके चंगुल से मुक्‍त कराया जाएगा. यह जानकारी कैट के महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने आज नई दिल्ली में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में दी. उन्‍होंने कहा कि जल्‍द ही वो वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण और वाणिज्‍य मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात कर मेट्रो एजी कंपनी द्वारा कानूनों के उल्‍लंघन करने पर कार्रवाई की मांग करेंगे. उन्‍होंने कहा कि इस तरह कंपनी द्वारा देश की अर्थव्‍यवस्‍था को भी नुकसान पहुंच रहा है.

प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि कैट ने विदेशी कंपनियों का भारत में व्यापार करने के लिए स्वागत किया है, लेकिन वो सीधा व्‍यापारियों से प्रतिस्‍पर्धा करें. व्यापारी कानूनों के उल्लंघन के माध्यम से अपने व्यवसाय पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण स्वीकार नहीं करेंगे. मेट्रो द्वारा कानून के उल्लंघन के कारण, छोटे व्यापारियों के व्यवसाय विशेष रूप से किराना, एफएमसीजी सामान, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं, व्यक्तिगत उपयोग की वस्तुओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. कैट ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से मामले का तत्काल संज्ञान लेने और उचित कार्रवाई करने का आग्रह किया है.

उन्‍होंने कहा कि मेट्रो कैश एंड कैरी के देशभर में 31 स्‍टोर हैं. एफडीआई कानून के तहत ये केवल बी 2बी व्‍यापार कर सकती हैं, यानी केवल होलसेल माल बेच सकते हैं उन्‍होंने आरोप लगाया कि मेट्रो हमेशा से भारत में एक सीधा बी2सी बिजनेस चलाना चाहती थी, जिसकी भारतीय कानून और विनियम विदेशी कंपनियों के लिए अनुमति नहीं देते हैं. विनियम उन्हें केवल व्यावसायिक ग्राहकों को बेचने की अनुमति देते हैं, जो बदले में अंतिम उपभोक्ताओं को बेच सकते हैं.

भारतीय कंपनियों को अंतिम उपभोक्‍ता को बिक्री की अनुमति

देश के आठ करोड़ से अधिक छोटे खुदरा विक्रेताओं की आजीविका की रक्षा के लिए केवल भारतीय कंपनियों के लिए अंतिम उपभोक्ताओं को बिक्री की अनुमति है. इन आठ करोड़ से अधिक छोटे खुदरा व्‍यापारियों से सालाना 130 लाख करोड़ का व्‍यवसाय होता है, ये सभी दुकानदार कानूनों का पालन करते हैं.

इस तरह हो रहा है अर्थव्‍यवस्‍था को नुकसान

कैट ने कहा कि इस तरह के व्‍यापार से जीएसटी का भी नुकसान होता है. कंपनी नियमों का उल्‍लंघन कर सस्‍ता सामान बेचती है, जिसमें जीएसटी कम लगता है, यही सामान छोटे दुकान नियम के अनुसान बेचते, तो उसमें जीएसटी कीमत के अनुसार लिया जाता. जिससे देश की अर्थव्‍यवस्‍था फायदा मिलता.

एक जीएसटी नंबर पर चार-चार कार्ड बने

कैट ने कंपनी पर यह भी आरोप लगाया कि एक जीएसटी नंबर पर चार-चार कार्ड बनाए जा रहे हैं. जीएसटी नंबर व्‍यापारी होता है, उस पर कार्ड बतना है लेकिन कंपनी एक नंबर पर चार-चार कार्ड बना रही है, जो कानून का उल्‍लंघन है. उन्‍होंने कहा मेट्रो के स्‍टोर में लोग ट्रालियां लेकर सामान लेते हैं, जबकि थोक दुकानदार ट्राली लेकर सामान नहीं लेता है, इसका मतलब लोग स्‍टोर से फुटकर सामान खरीद रहे हैं, जो कानूनी रूप में गलत है.

सरकार से तुरंत कार्रवाई करने की मांग

राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष बीसी भरतिया और महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने एक संयुक्त बयान में कहा कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मेट्रो जर्मनी भारत के कारोबार को बेचने और भारत में अपने निवेश पर 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का मुनाफा कमाने की सोच रहा है. जो पिछले वर्षों में भारत में भारी मुनाफा अर्जित करके धन का डायवर्जन के अलावा और कुछ नहीं है. ये मुनाफा भारत सरकार और छोटे भारतीय व्यापारियों की कीमत पर पिछले 20 वर्षों से देश के हर कानून का उल्लंघन करते हुए किया गया है. उन्‍होंने मांग कि सरकार इस पर तुरंत संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करे.

Tags: Business, CAIT, Confederation of All India Traders



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